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दीपावली पूजा विधि Ma Laxmi Pujan Vidhi on Diwali
दीपावली पूजा विधि Ma Laxmi Pujan Vidhi on Diwali

दीपावली पूजन समय – शाम 6.47 PM – 8.03 PM 11 Nov 2015

भक्ति भाव से किसी भी समय की गयी पूजा सदैव अच्छा फल देती है। इसलिए अगर किसी कारण से आप उपरोक्त दिये गये समय पर पूजा नही कर सकते तो जब भी समय मिले पूजा अर्चना अवश्य करें।

Diwali Puja Vidhi Laxmi Pujan Vidhi

दीपावली पूजन विधि मां लक्ष्मी पूजन विधि

दीपावली के दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर अयोध्या वापस लौटे थे। भगवान श्री राम के आने की खुशी में सभी ने दीप जलाकर एवं ढोल नगाड़े बजाकर उनका भव्य स्वागत किया था।

जो भी व्यक्ति भक्ति भाव से इस दिन भगवान श्री राम एवं माता सीता की पूजा अर्चना करता है उसका घर सदैव धन धान्य एवं खुशियों से भरा रहता है।

भगवान श्री राम विष्णु जी के अवतार है ं औ र माता सीता लक्ष्मी जी की, इसलिए इस दिन इनकी पूजा विष्णु एवं लक्ष्मी रूप मे ं की जाती है।

सर्वप्रथम एक लाल रंग का आसन लें एवं उस पर बैठ जायें। उसके बाद पंच पात्र में थोड़ा गंगा जल लें एवं बाद में उसमें सादा जल मिलाकर उसे उपर तक भर लें।

इसके उपरान्त आसन पर बै ठ जायें और मानसिक शुद्धि के लिए निम्नलिखित मन्त्र का उच्चारण करें। अपने शरीर पर थोड़ा सा जल छिड़कें-

ओम् अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा ।

यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ।।

अतिनील घनश्यामं नलिनायतलोचनम्

स्मरामि पुण्डरीकाक्षं तेन स्नातो भवाम्यहम् ।।

इसके पश्चात आचमन करें ।

सीधे हाथ में थोड़ा सा जल लें एवं यह मन्त्र पढ़ते हुए पी जाय

ओम् केशवाय नमः ।

पुनः सीधे हाथ मे थोड़ा सा जल लें एवं यह मन्त्र पढ़ते हुए पी जाय

ओम् माधवाय नमः ।

यह मन्त्र पढ़ते हुए हाथ धो लें ।

ओम् हृषीकेशाय नमः ।

इसके पश्चात आसन के नीचे हल्दी से एक त्रिकोण बनायें एवं यह मन्त्र पढ़ते हुए प्रणाम करें-

ओम् कामरूपाय नमः।

इसके पश्चात अपने आसन पर थोड़ा सा जल छिड़कं और निम्नलिखित मन्त्र पढ़ें-

ओम् पृथ्वि ! त्वया धृता लोका देवि ! त्वं विष्णुना धृता ।

त्वं च धारय मां नित्यं ! पवित्रं कुरू चासनम् ।।

यह मन्त्र पढ़ते हुए आसन को प्रणाम करें-

क्लीं आधार शक्त्यै कमलासनाय नमः।

इसके पष्चात थोड़ी पीली सरसो लें एवं निम्नलिखित मंत्र पढते हुए अपने चारो और फें क दें । यह आपका रक्षा कवच बन जायेगा और कोई भी बाह् य शक्ति आपकी पूजा में विघ्न नही डाल पायेगी ।

अपसर्पन्तु ते भूता ये भूता भुवि सं स्थिताः ।
ये भूता विघ्नकर्तारस्ते नष्यन्तु शिवाज्ञा ।।
अपक्रामन्तु भूतानि पिषाचाः र्सवतो दिशः ।
सर्वेषामविरोधेन पूजाकर्म समारभे ।।

इसके पश्चात दीपक प्रज्जवलित करें एवं निम्नलिखित मंत्र पढ।

भो दीप दे वीरूपस्तवं कर्मसाक्षी ह् यविघ्नकृत ।

यावत् कर्म समाप्ति स्यात् तावत् त्वं सुस्थिरो भव ।।

अब अपने गुरू का ध्यान करते हुए उनकी वन्दना करें-

अखण्ड मण्डलाकारं व्यापतं येन चराचरम् ।
तत पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरूवे नमः ।।
अज्ञान तिमिरान्धस्य ज्ञानांजन शलाक्या ।
चक्षुरून्मीलितं येन तस्मै श्री गुरूवे नमः ।।
देवतायाः दर्शनं च करूणा वरूणालयं ।
सर्व सिद्धि प्रदातारं श्री गुरूं प्रणमाम्यहम् ।।
वराभय कर नित्यं श्वेत पù निवासिनं ।
महाभय निहन्तारं गुरू देवं नमाम्यहम् ।।

इसके उपरांत श्रीनाथ, गणपति, भैरव आदि का ध्यान करके उन्हे ं नमन करें, क्योंकि इनकी कृपा के अभाव में कोई भी साधना पूर्ण नहीं हो ती है-

श्री नाथादि गुरू त्रयं गणपतिं पीठ त्रयं भैरवं,
सिद्धौघं बटु क त्रयं पदयुगं दूतिक्रमं मण्डलम् ।
वीरान्द्वयष्ट चतुष्कषष्टिनवकं वीरावली पंचकम्,
श्रीमन्मालिनि मंत्रराज सहितं वन्दे गु रोर्मण्डलम् ।।
वन्दे गुरूपद-द्वन्द्ववां ग-मन-सगोचरम्,
रक्त शुक्ल-प्रभा-मिश्रं-तक्र्यं त्रैपु रं महः !

गुरूदेव का ध्यान करने के उपरान्त निम्नांकित मंत्रों से दे वी-देवताओं को नमस्कार करें-

ओम् श्री गुरूवे नमः ।
ओम् क्षं क्षेत्रपालाय नमः ।
ओम वास्तु पुरूषाय नमः ।
ओम् विघ्न राजाय नमः ।
ओम् दुर्गाय नमः ।
ओम शम्भु शिवाय नमः ।
ओम् भैरवाय नमः ।
ओम् बटुकायै नमः ।
ओम् ब्रह्मायै नमः ।
ओम् नैर्ऋतियै नमः ।
ओम् चक्रपाणायै नमः ।
ओम् विघ्न नाथायै नमः ।
ओम् ऋष्येै नमः ।
ओम् दे वतायै नमः ।
ओम् वेद शास्त्रायै नमः ।
ओम् वेदार्थाय नमः ।
ओम् पुराणायै नमः ।
ओम् ब्राह्मणायै नमः ।
ओम् योगिन्योै नमः ।
ओम् दिक्पालायै नमः ।
ओम् सिद्धपीठायै नमः ।
ओम् तीर्थायै नमः ।
ओम् मंत्र-तंत्र-यंत्रायै नमः ।
ओम् मातृकायै नमः ।
ओम् पंचभूतायै नमः ।
ओम् महाभूतायै नमः ।
ओम् सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः ।
ओम् सर्वाभ्यो देवीभ्यो नमः ।
ओम् सर्वेभ्यो ऋषिभ्यो नमः ।

एक थाली ले उसमें रोली से श्रीं लिखें उसके ऊपर गणेश जी, मां लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु जी की स्थापना करें ।

इसके पश्चात गणेश जी का आवाहन करे एवं उनक दीप, धूप, पुष्प, फल आदि से पूजन करें ।

गणेश पूजन के पश्चात मां लक्ष्मी जी का आवाहन करें एवं उनका दीप, धूप, पु ष्प, फल आदि से पूजन करें ।

अष्ट लक्ष्मी पूजन करें । प्रत्येेेक नाम लेते हुए लाल पुष्प एवं चावल मां लक्ष्मी को समर्पित करें -

ओम् आद्यलक्ष्म्यै नमः । ओम् विद्यालक्ष्म्यै नमः । ओम् सौभाग्यलक्ष्म्यै नमः । ओम् अमृतलक्ष्म्यै नमः ।

ओम् कामलक्ष्म्यै नमः । ओम् सत्यलक्ष्म्यै नमः । ओम् भोगलक्ष्म्यै नमः । ओम् योगलक्ष्म्यै नमः ।

इसके पश्चात मां काली का ध्यान करते हुए ओम् श्रीमहाकाल्यै नमः मंत्र जपते हुए दीप, धूप, पुष्प, फल आदि से पूजन करें ।

इसके पश्चात मां सरस्वती का ध्यान करते हुए ओम् वीणापुस्तकधारिण्यै श्रीसरस्वत्यै नमः मंत्र जपते हु ए दीप, धूप, पु ष्प, फल आदि से पूजन करें इसके पश्चात भगवान विष्णु का आवाहन करें एवं उनका दीप, धूप, पुष्प, फल आदि से पूजन करें ।

इसके पश्चात भगवान शिव का आवाहन करें एवं उनका दीप, धूप, पुष्प, फल आदि से पूजन करें ।

इसके पश्चात कुबेर जी का आवाहन करें -

आवाहयामि देव त्वामिहायाहि कृपां कुरू ।
कोशं वर्द्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर ।।

ओम् कुबेराय नमः मंत्र से कुबेर जी का दीप, धूप, पुष्प, फल आदि से पूजन करें ।

इसके बाद श्री सूक्त के 16 श्लोकों का पाठ करें ।

श्री सूक्त

ओम् हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्ण रजतस्त्रजाम् ।

चन्द्रां हिरण्यमयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।

तां म आ वह जातवे दो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।

यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ।।

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनाद प्रमोदिनीम् ।

श्रियं दे वीमुप ह् वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।

कां सोस्मितां हिरण्यप्रकारामाद्र्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।

पद् मेस्थितां पद् मवर्णां तामिहोप ह् वये श्रियं ।।

चन्द्रां प्रभासां यशसा जवलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।

तां पद् मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।

आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः ।

तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।।

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह ।

प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।

क्षु त्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।

अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद में गृहात् ।।

गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।

ईश्वरीं सर्वभूतानां तामि होप ह् वये श्रियम् ।।

मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि ।

पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।

कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम ।

श्रियं वासय में कुले मातरं पद् ममालिनीम् ।।

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे ं गृहे ।

नि च दे वीं मातरं श्रियं वासय में कुले ।।

आद्र्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंगलां पद् ममालिनीम् ।

चन्द्रां हिरण्यमयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।

आद्र्रां यः करिणीं यष्टिं सु वर्णां हेममालिनीम् ।

सूर्या हिरण्यमयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।

तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।

यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ।।

यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् ।

सूक्तं पंचदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत् ।। 16 ।।

लक्ष्मी जी केवल विष्णु जी के साथ ही स्थिर रहती हैं। इसलिए यथासम्भव भगवान विष्णु जी की पूजा अवश्य करें । श्री सूक्त के पाठ के पश्चात लक्ष्मीनारायण मंत्र का जप करें इससे मां लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु की पूजा एक साथ हो जाती है।

मंत्र - ओम् ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः ।

इसके पश्चात दीपदान करें एवं आरती करें ।

नोट - विशेष फल प्रप्ति के लिए श्री सूक्त के साथ कनकधारा स्तोत्र एवं पुरूष सूक्त का भी पाठ करें । श्री सूक्त के श्लोकों से अथवा लक्ष्मी नारायण मंत्र से हवन भी किया जा सकता है।

दीपावली के दिन रात्री काल मे अपने इष्ट देवी-देवता के मंत्र का जप अधिक से अधिक संख्या मे ं करना चाहिए । यदि आपने कभी भी किसी मंत्र का कोई अनुष्ठान किया है तो होली, दीपवली, दशहरा एवं ग्रहण काल में उसकी कम से कम एक माला अवश्य करनी चाहिए ।

आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं । आपका जीवन सदैव खुशियों से भरा रहे हमारी बस यही कामनां है।

जय मां पीताम्बरा

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