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उम्मीदों व आशाओं का राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस

उम्मीदों व आशाओं का राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस विशेष

हम अपने घर में चैन से इसीलिए रह पाते हैं क्यूंकि हमारे घर में हमारी मर्जी चलती है. हम जो चाहते हैं अपने घर में कर पाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि हमारे घर में हमारे अपने कानून और नियम होते हैं. इसी तरह एक देश की आजादी उसका संविधान नियंत्रित करता है. देश तभी जाकर पूर्ण आजाद माना जाता है जब वह गणतांत्रिक होता है. आज भारत की संप्रभुता, गर्व, नागरिक उन्नयन व लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिवस मनाया जा रहा है. 26 जनवरी, 1950 को ही देश के संविधान को लागू किया गया था. तब से आज तक इस दिन को देश गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाता है.

211 विशेषज्ञों के द्वारा दो साल ग्यारह महीने और 18 दिनों में भारत का संविधान बनकर तैयार हुआ था. इसके बाद 26 जनवरी, 1950 को देश का संविधान लागू किया गया था. तब से यह दिन भारत के लिए विशेष महत्व रखता है.

इतिहास की नजर में 26 जनवरी

26 जनवरी आजादी से पहले भी देश के लिए एक अहम दिन था. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1930 के लाहौर अधिवेशन में पहली बार तिरंगे झंडे को फहराया गया था परंतु साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण फैसला इस अधिवेशन के दौरान लिया गया. इस दिन सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया था कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिन “पूर्ण स्वराज दिवस” के रूप में मनाया जाएगा. इस दिन सभी स्वतंत्रता सेनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे. इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का स्वतंत्रता दिवस बन गया था.

उम्मीदों व आशाओं का राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस

डा. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में बनाया गया भारतीय संविधान 395 अनुच्‍छेदों और 8 अनुसूचियों के साथ दुनिया में सबसे बड़ा लिखित संविधान था जो और भी विस्तृत हो चुका है. 26 जनवरी, 1950 को संविधान के लागू होने के साथ सबसे पहले डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाउस के दरबार हाल में भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ ली और इसके बाद राष्‍ट्रपति का काफिला 5 मील की दूरी पर स्थित इर्विन स्‍टेडियम पहुंचा जहां उन्‍होंने राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया. और तब से ही इस दिन को राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाया जाता है. किसी भी देश के नागरिक के लिए उसका संविधान उसे जीने और समाज में रहने की आजादी देता है. इस तरह गणतंत्र दिवस और संविधान की उपलब्धता काफी अधिक है.

गणतंत्र दिवस की परेड आज विश्व भर में भारत की पहचान बनकर उभरी है. गणतंत्र दिवस को भारत की शक्ति का असली परिचय मिलता है. सेना, सशस्त्र बलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सुसज्जित यह परेड आज भारत का गौरव गान करती है. गणतंत्र दिवस की परेड की खूबसूरती और उसका अहमियत को शब्दों में लिख पाना बेहद मुश्किल है.

आस्ट्रेलिया के लिए भी अहम 26 जनवरी

26 जनवरी का दिन भारत के साथ ही साथ ऑस्ट्रेलिया के लिए खास महत्व रखता है. ऑस्ट्रेलिया में 26 जनवरी को आधिकारिक राष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया है. 26 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया डे भी कहा जाता है. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री इस मौके पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं. यह दिन ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश उपनिवेश के आरंभ को दर्शाता है.

लेकिन जिस गणतंत्र ने हमें अभिव्यक्ति की आजादी, कहीं भी रहने और घूमने की आजादी और अन्य अधिकार दिए थे उसे हम याद ही नहीं रख पाए. आज लोग अपने अधिकारों के लिए तो लड़ते हैं लेकिन अपने कर्तव्यों से दूर भागते हैं. और यही वजह है आज 62 साल बाद भी देश गणतंत्र होने के बावजूद भ्रष्टाचार, महंगाई और सामाजिक बेड़ियों में जकड़ा हुआ है.

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