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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2017: जानें महत्व, तिथि व मुहूर्त, करें ये 5 उपाय, मिलेगा धन और यश का लाभ

janmashtami subh muhurat

जन्माष्टमी 2017 : तिथि और शुभ मुहूर्त - Janmashtami Subh Muhurat - Janmashtami Tithi

जन्माष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त : स्मार्त संप्रदाय के अनुसार जन्माष्टमी 14 अगस्त को मनाई जाएगी तो वहीं वैष्णव संप्रदाय के 15 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा।

जन्माष्टमी 2017 : 14 अगस्त
निशिथ पूजा: 12:03 से 12:47
निशिथ चरण के मध्यरात्रि के क्षण है: 12:25 बजे
15 अगस्त पराण: शाम 5:39 के बाद
अष्टमी तिथि समाप्त: 5:39

जन्माष्टमी का महत्व - Janmashtami Importance

मथुरा में कंस नाम का निर्दयी राजा राज करता था उसकी प्रजा उससे प्रसन्न नहीं थी। कंस की एक छोटी बहन थी जिसका नाम राजकुमारी देवकी था, जिसे वह बहुत प्यार करता था। कंस ने अपनी बहन देवकी की शादी वासुदेव के साथ करा दी, अचानक आकाश से एक भविष्यवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण होगा। यह सुनने के बाद क्रुर कंस ने अपनी बहन देवकी और वासुदेव को बंदी बना लिया और दोनों कई सालों के लिए कारागार में डाल दिया। इन सालों में कंस ने देवकी द्वारा जन्म दी गई 6 संतानों का वध कर दिया। हालांकि कंस को देवकी की सातवीं संतान के बारे में बताया गया कि उसका गर्भपात हो गया लेकिन वे रहस्यमय ढंग से वृंदावन की राजकुमारी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर चुके थे, जो बड़े होकर भगवान कृष्ण के भाई बलराम बने। वहीं श्रीकृष्ण के जन्म के वक्त भगवान निर्देशानुसार वासुदेव कृष्ण को नंद और यशोदा के पास वृंदावन ले गए थे। उस दिन बहुत भयानक तूफान और बारिश थी वासुदेव ने श्रीकृष्ण को एक टोकरी में अपने सिर पर रखकर नदी पार की इस दौरान शेषनाग ने श्रीकृष्ण की बारिश से रक्षा की। वासुदेव ने कृष्ण को नंद को सौंप दिया और वहां से एक बच्ची के साथ लौट आए जिसका जन्म भी उसी दिन हुआ था। इसके बाद जब कंस ने इस बच्ची को मारने की कोशिश की तो यह बच्ची देवी स्वरूप हवा में उड़ गई और फिर से कंस को उसकी मृत्यु को लेकर चेतावनी सुनाई दी। कुछ सालों बाद श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया और मथुरा एक बार फिर खुशहाल राज्य बन गया।

जन्माष्टमी पूजा विधि - Janmashtami Puja Vidhi

  • उपवास की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • उपवास के दिन प्रातःकाल स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। पश्चात सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें।
  • इसके बाद जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें :
    ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये ।
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥
  • अब मध्याह्न के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए 'सूतिकागृह' नियत करें।
  • तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अथवा ऐसे भाव हो।
  • इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें।
  • पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः निर्दिष्ट करना चाहिए।
  • फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें :-
    'प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः।
    वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः।
    सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।'
  • अंत में रतजगा रखकर भजन-कीर्तन करें। साथ ही प्रसाद वितरण करके कृष्‍ण जन्माष्टमी पर्व मनाएं।

जन्माष्टमी के दिन करें ये 5 उपाय, मिलेगा धन और यश का लाभ

  • धन प्राप्त करने के लिए जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद राधा-कृष्ण मंदिर में जाकर भगवान कृष्ण को पीले माला अर्पित करना चाहिए।
  • जन्माष्टमी के दिन दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान कृष्ण का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से भगवान कृष्ण के साथ माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती है और मन की मुराद पूरी होती है।
  • भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा पाने के लिए सफेद मिठाई, साबुदाने या फिर खीर बनाकर भोग लगाएं और उसमें मिश्री और तुलसी के पत्ते डालें। इससे भगवान श्रीकृष्ण जल्दी ही प्रसन्न हो जाते हैं।
  • आपके किसी भी काम में कभी कोई बाधा न आए तो इसके लिए जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण मंदिर में जटा वाला नारियल और 11 बादाम चढ़ाएं।
  • नौकरी में तरक्की के लिए जन्माष्टमी के दिन खीर बनाकर कन्याऔं को खिलाएं। ऐसा करने से भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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