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Pitru Paksha 2017: सत्य तक पहुंचने का मार्ग है श्राद्ध, इन चीजों का दान करने से मिलेगी सुख-समृद्धि!

Pitru Paksha 2017
खास बातें
  • मोक्ष का महापर्व पितृ पक्ष छह सितंबर से शुरू हो गया
  • पूजा, दान और खरीदारी करें
  • गाय के दान को सभी दानों से उत्तम माना जाता है

नई दिल्ली: मोक्ष का महापर्व पितृ पक्ष छह सितंबर से शुरू हो गया है. यह 15 दिनों तक चलेंगे. इस दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर महालया प्रारंभ होते ही पितृ पक्ष का शुभारंभ हो जाएगा. इस दिन पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध कर्म किया जाएगा.

तिथि घटने से लगातार दूसरी बार इस वर्ष भी श्राद्ध का एक दिन कम हो गया. इसलिए इसबार 16 दिन की जगह 15 दिन ही श्राद्ध होगा. 2016 में भी श्राद्ध 15 के दिन के थे. लगातार दूसरे वर्ष तिथि घटने से पितृ पक्ष का एक दिन कम हो गया है.

भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक सोलह दिनों को पितृपक्ष कहा जाता है. शास्त्रों में मनुष्यों पर उत्पन्न होते ही तीन ऋण बताए गए हैं- देव ऋण, ऋषिऋण और पितृऋण. श्राद्ध के द्वारा पितृऋण से निवृत्ति प्राप्त होती है. पितृपक्ष के सोलह दिनों में श्रद्धा भक्ति पूर्वक तर्पण (पितरों को जल देना) करना चाहिए.

पूजा, दान और खरीदारी करें: श्राद्ध में पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं. इसमें खरीदी से कोई नुकसान नहीं होता है. श्राद्ध के दौरान 8 सितंबर को दोपहर 12.31 से अमृत सिद्धि योग, 11 सितंबर को सुबह 09.21 से रवि योग, 12 सितंबर को सुबह 06.16 से सर्वार्थसिद्धि योग, 14 सितंबर को रात 2 बजे से सर्वार्थसिद्धि योग लगेगा जो 15 सितंबर तक रहेगा. 17 सितंबर को भी मंगल उदय हो रहा है. इन योग में पूजा, दान और खरीदारी आदि कर सकते हैं.

  • गाय के दान को सभी दानों से उत्तम माना जाता है. श्राद्ध में गाय का दान करने से सुख- शांति और धन- समृद्धि की प्राप्ति होती है.
  • श्राद्ध के प्रत्येक कार्य में तिल का महत्व है. जिसके कारण श्राद्ध में तिलों का दान कष्ट और मुश्किलों में रक्षा करता है.
  • श्राद्ध में गाय का शुद्ध घी बर्तन में रखकर दान करने से परिवार के लिए शुभ होता है.

श्राद्ध पांच प्रकार के होते हैं: श्राद्ध पांच प्रकार के होते हैं जिनमे पितृपक्ष के श्राद्ध पार्वण श्राद्ध कहलाते हैं. जिसकी मृत्यु तिथि का ज्ञान न हो उसका श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए. मृतक का श्राद्ध मृत्यु होने वाले दिन करना चाहिए. दाह संस्कार वाले दिन श्राद्ध नहीं किया जाता. अग्नि में जलकर, विष खाकर, दुर्घटना में या पानी में डूबकर, शस्त्र आदि से अपमृत्यु वालों का श्राद्ध चर्तुदशी को करना चाहिए चाहे उनकी मृत्यु किसी भी तिथि में हुई हो.

Tags: 2017 Shradh, Pitru Paksha 2017, pitra paksha, श्राद्ध, पितृ पक्ष, श्राद्ध के प्रकार

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