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करवा चौथ व्रत विधि
करवा चौथ व्रत विधि

कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

करवा चौथ 2015 (Karwa Chauth 2015): इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 30 अक्टूबर को रखा जाएगा।

करवा चौथ व्रत विधि (Karwa Chauth Vrat Vidhi in Hindi): मान्यता है कि इस दिन विवाहित महिलाओं को निर्जला व्रत का पालन करना चाहिए। पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम के समय पूर्ण श्रृंगार कर करवा चौथ व्रत की कथा (Karva Chauth Ki Kahani) सुननी चाहिए। कथा के बाद किसी बुजुर्ग महिला को "करवा (छोटे घड़े जैसा पात्र)" देकर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। रात्रि के समय चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करना चाहिए।

चन्द्रोदय समय (Karwa Chauth Puja Timings): साल 2015 में करवा चौथ के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 33 मिनट से लेकर 06 बजकर 52 मिनट तक का है। इस वर्ष करवा चौथ के दिन चंद्रोदय रात 08.16 बजे होगा। करवा चौथ के दिन चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत पारण किया जाता है।

करवा चौथ व्रत कथा

करवा चौथ के दिन व्रत कथा पढ़ना अनिवार्य माना गया है। करवा चौथ की कई कथाएं है लेकिन सबका मूल एक ही है। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 30 अक्तूबर 2015 को रखा जाएगा। करवा चौथ की एक प्रचलित कथा निम्न है:

करवा चौथ व्रत कथा (Karwa Chauth Vrat Katha in Hindi)

महिलाओं के अखंड सौभाग्य का प्रतीक करवा चौथ व्रत की कथा कुछ इस प्रकार है- एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।

साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया।

साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया।

इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।

कहते हैं इस प्रकार यदि कोई मनुष्य छल-कपट, अहंकार, लोभ, लालच को त्याग कर श्रद्धा और भक्तिभाव पूर्वक चतुर्थी का व्रत को पूर्ण करता है, तो वह जीवन में सभी प्रकार के दुखों और क्लेशों से मुक्त होता है और सुखमय जीवन व्यतीत करता है।

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