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क्‍या है सूचना का अधिकार अधिनियम | About Right to Information Act


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सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act) भारत के संसद द्वारा पारित एक कानून है जो 12 अक्तूबर, 2005 को लागू हुआ। भारत में भ्रटाचार को रोकने और समाप्त करने के लिये इसे बहुत ही प्रभावी कदम बताया जाता है। इस नियम के द्वारा भारत के सभी नागरिकों को सरकारी रेकार्डों और प्रपत्रों में दर्ज सूचना को देखने और उसे प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया है। जम्मू एवं काश्मीर मे यह जम्मू एवं काश्मीर सूचना का अधिकार अधिनियम २०१२ के अन्तर्गत लागू है। …

सूचना का अधिकार नियम 2005

भारत में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भारत सरकार ने 12 अक्तूबर, 2005 को सूचना का अधिकार नियम लागू किया था तो आइये जानें क्‍या है सूचना का अधिकार नियम -

सूचना का अधिकार (Right to Information) नियम की सहायता से आप किसी भी सरकारी विभाग, पब्लिक सेक्टर यूनिट, किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता से चल रहीं ग़ैर सरकारी संस्थाएं एवं शिक्षण संस्थाएं आदि से किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्‍त कर सकते हैं हालांकि कुछ राज्‍य सरकार पहले ही राज्य कानून पारित कर चुकीं थीं इनमें जम्मू कश्मीर, दिल्ली, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम और गोवा शामिल हैं सूचना का अधिकार नियम जम्‍मू कश्‍मीर में लागू नहीं होते हैं यह नियम आपको निम्‍न प्रकार की शक्ति प्रदान करता है।

  • सरकार से कुछ भी पूछे या कोई भी सूचना मांगे.
  • किसी भी सरकारी निर्णय की प्रति ले.
  • किसी भी सरकारी दस्तावेज का निरीक्षण करे.
  • किसी भी सरकारी कार्य का निरीक्षण करे.
  • किसी भी सरकारी कार्य के पदार्थों के नमूने ले.

प्रत्‍यके सरकारी विभाग में एक जन/लोक सूचना अधिकारी (पीआईओ - PIO) नियुक्‍त किया होता है उसका कार्य जनता को सूचना उपलब्ध कराना एवं आवेदन लिखने में उसकी मदद करना है अगर आपको जन/लोक सूचना अधिकारी के बारे में नहीं पता है तो आप आवेदन विभागाध्यक्ष को भेज सकते हैं आप अपना आवेदन स्‍वंय या डाक द्वारा भेेेज सकतेेे हैं आपको अगर केन्‍द्र सरकार के किसी विभाग से सूचना पानी है तो आपको 10 आवेदन शुल्क देना पडेगा लेकिन राज्‍य सरकारों ने अलग-अलग शुल्क निर्धारित कर रखे हैं -

अगर आपने अपना आवेदन सीधे पीआईओ को दिया है तो आपको सूचना 30 दिन के अंदर मिल जानी चाहिए और अगर आपने आवेेेेदन सहायक पीआईओ को दिया गया है तो सूचना 35 दिनों के भीतर मिल जानी चाहिए

आवेदन का प्रारूप क्या हो

केंद्र सरकार के विभागों के लिए कोई निर्धारित प्रारूप नहीं है। आप एक सादे काग़ज़ पर एक सामान्य अर्ज़ी की तरह ही आवेदन बना सकते हैं और इसे पीआईओ के पास स्वयं या डाक द्वारा जमा कर सकते हैं। (अपने आवेदन की एक प्रति अपने पास निजी संदर्भ के लिए अवश्य रखें)।

कौन सी सूचनाऍ नहीं मिलेंगी

जो भारत की प्रभुता, अखण्डता, सुरक्षा, वैज्ञानिक या आर्थिक हितों व विदेशी संबंधों के लिए घातक हो। जिससे आपराधिक जाँच पड़ताल, अपराधियों की गिरफ्तारी या उन पर मुकदमा चलाने में रुकावट पैदा हो। जिससे किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा खतरे में पड। जिससे किसी व्यक्ति के निजी ज़िन्दगी में दख़ल-अंदाजी हो और उसका जनहीत से कोई लेना देना ना हो।

नेशनल आरटीआई अवार्डः सूचना के सिपाहियों का सम्मान

दिल्ली की एक संस्था पीसीआरएफ ने 2009 में एक अवार्ड की शुरुआत की। मक़सद था उन लोगों की हौसला अफजाई और सम्मान, जिन्होंने अपनी जान की बाज़ी लगाकर भ्रष्टाचार के ख़िला़फ हल्ला बोला, जिन्होंने सूचना क़ानून का इस्तेमाल करके सरकारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया। सच और ईमानदारी से काम करने वाले कई आरटीआई कार्यकर्ता को इसकी क़ीमत अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी। उन सभी देश भक्त लोगो को हम सब का सलाम !!!!!

सूचना के अधिकार के विषय में सामान्य सवाल (FAQ on RTI)

मुझे सूचना कौन देगा? मैं आवेदन किसे जमा करूं?

सभी सरकारी विभागों के एक या एक से अधिक अधिकारियो को लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किया गया है। आपको अपना आवेदन उन्हें ही जमा करना है। यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे आपके द्वारा मांगी गई सूचना विभाग की विभिन्न शाखाओं से इकट्ठा करके आप तक पहुंचाएं। इसके अलावा बहुत से अधिकारी सहायक लोक सूचना नियुक्त किए गए हैं। इनका काम सिर्फ जनता से आवेदन ले कर उसे सम्बंधित जन सूचना अधिकारी के पास पहुंचाना है।

मुझे जन सूचना अधिकारी के पते की जानकारी कैसे मिलेगी?

यह पता लगाने के बाद कि आपको किस विभाग से सूचना मांगनी है। लोक सूचना अधिकारी के विषय में जानकारी उसी विभाग से मांगी जा सकती है। पर यदि आप उस विभाग में नहीं जा पा रहे हैं या विभाग आपको जानकारी नहीं दे रहा तो आप अपना आवेदन इस पते पर भेज सकते है- लोक सूचना अधिकारी , द्वारा - विभाग प्रमुख (विभाग का नाम व पता। यह उस विभाग प्रमुख की ज़िम्मेदारी होगी कि इसे सम्बंधित लोक सूचना अधिकारी के पास पहुंचाए। आप विभिन्न सरकारी वेबसाइटों से भी लोक सूचना अधिकारी की सूची प्राप्त कर सकते हैं जैसे -www.rti.gov.in.

क्या कोई जन सूचना अधिकारी मेरा आवेदन यह कह कर अस्वीकार कर सकता है कि आवेदन या उसका कोई हिस्सा उससे सम्बंधित नहीं हैं?

नहीं वह ऐसा नहीं कर सकता। अनुच्छेद ६(३) के अनुसार वह सम्बंधित विभाग के पास आपके आवेदन को भेजने और इसके बारे में आपको सूचित करने के लिए बाध्य है।

यदि किसी विभाग ने लोक सूचना की नियुक्ति न की हो तो क्या करना चाहिए?

अपना आवेदन लोक सूचना अधिकारी द्वारा विभाग प्रमुख के नाम से नियत शुल्क के साथ सम्बंधित सरकारी अधिकारी को भेज दें। आप अनुच्छेद 18 के तहत राज्य के सूचना आयोग से भी शिकायत कर सकते हैं। सूचना आयुक्त के पास ऐसे अधिकारी पर 25000 रूपये का जुर्माना लगाने का अधिकारी है। जिसने आपका आवेदन लेने से इनकार किया हैं। शिकायत करने के लिए आपको सिर्फ सूचना आयोग को एक साधरण पत्र लिखकर यह बताना है कि फलां विभाग ने अभी तक लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति नहीं की है। और उस पर जुर्माना लगना चाहिए।

क्या लोक सूचना अधिकारी मुझे सूचना देने से मना कर सकता है?

लोक सूचना अधिकारी सूचना के अधिकारी कानून के अनुच्छेद 8 में बताए गए विषयों से सम्बंधित सूचनाएं देने से मना कर सकता है। इसमें विदेशी सरकारों से प्राप्त गोपनीय सूचनाएं, सुरक्षा अनुमानों से सम्बंधित सूचनाएं, रणनीतिक, वैज्ञानिक या देश के आर्थिक हितों से जुड़े मामले, विधनमण्डल के विशेषाधिकार हनन सम्बंधित मामले से जुड़ी सूचना शमिल हैं। अधिनियम की दूसरी अनुसूची में ऐसी 18 एजेंसियों की सूची दी गई है जहां सूचना का अधिकार लागू नहीं होता है, फिर भी, यदि सूचना भ्रष्टाचार के आरोपों या मानवाधिकारो के हनन से जुड़ी हुई है तो इन विभागों को भी सूचना देनी पड़ेगी।

क्या इसके लिए कोई शुल्क भी लगेगा?

क्या इसके लिए कोई शुल्क भी लगेगा?
हां, इसके लिए शुल्क निम्नवत है -
आवेदन शुल्क - 10 रूपये
सूचना देने का खर्च - 2 रू प्रति पृष्ठ
दस्तावेजों की जांच करने का शुल्क - जांच के पहले घंटे का कोई शुल्क नहीं पर उसके बाद हर घंटे का पांच रूपये शुल्क देना होगा।यह शुल्क केन्द्र व कई राज्यों के लिए ऊपर लिखे अनुसार है लेकिन कुछ राज्यों में यह इससे अलग है। इस बारे में विस्तार से जानकारी के लिए यहाँ किल्क करें।

मैं शुल्क कैसे जमा कर सकता है?

आवेदन शुल्क के लिए हर राज्य की अपनी अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। आम तौर पर आप अपना शुल्क निम्नलिखित तरीकों से जमा करा सकते हैं-

  •  डिमाण्ड ड्राफट
  • भारतीय पोस्टल ऑर्डर
  • मनी ऑर्डर से (कुछ राज्यों में लागू)
  •  बैंकर्स चैक से
  • केन्द्र सरकार से  मामलों में इसे एकाउंट आफिसर्स    (Account Officer) के नाम देय होने चाहिए
  •  कुछ राज्य सरकारों ने इसके लिए निश्चित खाते खोले हैं। आपको उस खाते में शुल्क जमा करना होता है। इसके  लिए स्टेट बैंक की किसी भी शाखा में नकद जमा करके उसकी रसीद आवेदन के साथ नत्थी करनी होती है। या आप उस खाते के पक्ष में देय पोस्टल ऑर्डर या डीडी भी आवेदन के साथ संलग्न कर सकते हैं।
  •  कुछ राज्यों में, आप आवेदन के साथ निर्धारित  मूल्य का कोर्ट की स्टैम्प भी लगा सकते हैं।
  • पूरी जानकारी के लिए कृपया  सम्बंधित राज्यों के नियमों का अवलोकन करें।

मैं अपना आवेदन कैसे जमा कर सकता हूँ?

आप व्यक्तिगत रूप से, स्वयं लोक सूचना अधिकारी या सहायक लोक सूचना अधिकारी के पास जाकर या किसी को भेजकर आवेदन जमा करा सकते हैं। आप इसे लोक सूचना अधिकारी या सहायक लोक सूचना अधिकारी के पते पर डाक द्वारा भी भेज सकते हैं। केन्द्र सरकार के सभी विभागों के लिए 629 डाकघरों को केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी बनाया गया है। आप इनमें से किसी भी डाकघर में जाकर आवेदन और शुल्क जमा कर सकते हैं।

यदि लोक सूचना अधिकारी या सम्बंधित विभाग मेरा आवेदन स्वीकार नहीं करता तो मुझे क्या करना चाहिए?

आप इसे पोस्ट द्वारा भेज सकते हैं। अधिनियम की धारा 18 के अनुसार आपको सम्बंधित सूचना आयोग में शिकायत भी करनी चाहिए। सूचना आयुक्त के पास उस अधिकारी के खिलाफ २५००० रू तक जुर्माना लगाने का अधिकारी है जिसने आपका आवेदन लेने से मना किया है। शिकायत में आपको सूचना आयुक्त को सिर्फ एक पत्र लिखना होता है, जिसमें आप आवेदन जमा करते समय पेश आने वाली परेशानियों के विषय में बताते हुए लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाने का निवेदन कर सकते हैं।

क्या सूचना प्राप्त करने की कोई समय सीमा है?

हां, यदि आपने जन सूचना अधिकारी के पास आवेदन जमा कर दिया है तो आपको हर हाल में 30 दिनों के भीतर सूचना मिल जानी चाहिए। यदि आपने आवेदन सहायक लोक सूचना अधिकारी के पास डाला है तो यह सीमा 35 दिनों की है। यदि सूचना किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतन्त्राता को प्रभावित कर सकती है तो सूचना 48 घंटों में उपलबध् करायी जाती है। द्वितीय अनुसुची में शामिल संगठनो के लिए यह सूचना 45 दिनों में, तथा तृतीय पक्ष में 40 दिनों उपलब्ध् कराने का प्रावधन है।

क्या लोक सूचना अधिकारी पर लगा जुर्माना आवेदक को मिलता है?

नहीं। जुर्माने की राशि सरकारी खजाने में जमा होती है. हालांकि धारा 19 के अनुसार, आवेदक सूचना मिलने में हुई देरी के कारण हर्जाने की मांग कर सकता है।

यदि मुझे सूचना नहीं मिलती तो मुझे क्या करना चाहिए?

यदि आपको सूचना नहीं मिली या आप सूचना से असन्तुष्ट है, तो आप अधिनियम की धारा१९ के
तहत प्रथम
अपील अधिकारी के पास प्रथम अपील डाल सकते हैं।

प्रथम अपील अधिकारी कौन होता है?

हर सरकारी विभाग में लोक सूचना अधिकारी से वरिष्ठ पद के एक अधिकारी को प्रथम अपील अधिकारी बनाया गया है। सूचना न मिलने या गलत मिलने पर पहली अपील इसी अधिकारी के पास की जाती है।

क्या प्रथम अपील के लिए कोई फॉर्म है?

नहीं, प्रथम अपील के लिए कोई फार्म नहीं है। (लेकिन कुछ राज्य सरकारों ने फॉर्म निर्धरित किये है प्रथम अपील अधिकारी के पते पर आप सादे काग़ज़ पर आवेदन कर सकते हैं। सूचना के अधिकारी के अपने आवेदन की एक प्रति तथा यदि लोक सूचना अधिकारी की ओर से आपको कोई जवाब मिला है तो उसकी प्रति अवश्य संलग्न करें।

क्या प्रथम अपील के लिए कोई शुल्क अदा करना पड़ता है?

नहीं, प्रथम अपील के लिए आपको कोई शुल्क अदा नहीं करना है, हालांकि कुछ राज्य सरकारों ने इसके लिए शुल्क निर्धारित किया है.

कितने दिनों में मैं प्रथम अपील दाखिल कर सकता हूं?

अधूरी या गलत सूचना प्राप्ति के 30 दिन के भीतर अथवा यदि कोई सूचना नहीं प्राप्त हुई है तो सूचना के अधिकार का आवेदन जमा करने के 60 दिन के भीतर आप प्रथम अपील दाखिल कर सकते हैं।

यदि प्रथम अपील दाखिल करने के बाद भी सन्तुष्टिदायक सूचना न मिले?

यदि पहली अपील दाखिल करने के पश्चात भी आपको सूचना नहीं मिली है तो आप मामले को आगे बढ़ते हुए दूसरी अपील कर सकते हैं।

दूसरी अपील क्या है?

सूचना के अधिकारी कानून के अन्तर्गत सूचना प्राप्त करने के लिए दूसरी अपील करना, अन्तिम विकल्प है। दूसरी अपील आप सूचना आयोग में कर सकते हैं। केन्द्र सरकार के विभाग के खिलाफ अपील दाखिल करने के लिए केन्द्रीय सूचना आयोग है। सभी राज्य सरकारों के विभागों के लिए लिए राज्यों में ही सूचना आयोग हैं।

सूचना के अधिकारों के दायरे में कौन कौन से विभाग आते हैं?

केन्द्रीय सूचना का अधिकारों अधिनियम जम्मू-कश्मीर के अलावा पूरे देश में लागू है। ऐसे सभी निकाय जिनका गठन संविधान के तहत, या उसके अधीन किसी नियम के तहत, या सरकार की किसी अधिसूचना के तहत हुआ हो इसके दायरे में आते हैं। साथ ही साथ वे सभी इकाईया जो सरकार के स्वामित्व में हों, सरकार के द्वारा नियन्त्रि त हों अथवा सरकार के द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तपोषित हों।

क्या निजी निकाय भी सूचना का अधिनियम अधिनियम के अन्तर्गत आते हैं?

सभी निजी निकाय जो सरकार द्वारा शासित, नियन्त्रित अथवा आंशिक वित्तपोषित होते हैं सीधे सीधे इसके दायरे में आते हैं। अन्य निजी निकाय अप्रत्यक्ष रूप से इसके दायरे में आते हैं। इसका मतलब है कि यदि कोई सरकारी विभाग किसी नियम कानून के तहत यदि निजी निकाय से कोई जानकारी ले सकता है तो उस सरकारी विभाग में निजी निकाय से जानकारी लेने के लिए सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया जा सकता है।

क्या निजी निकाय भी सूचना का अधिनियम अधिनियम के अन्तर्गत आते हैं?

अधिनियम की धरा 6(2) में स्पष्ट कहा गया है कि आवेदक से सूचना मांगने का कारण नहीं पूछा जाएगा। सूचना का अधिकार अधिनियम इस तथ्य पर आधरित है कि जनता टैक्स देती है और इसलिए उसे जानने का हक है कि उसका पैसा कहां खर्च हो रहा है और उसका सरकारी तन्त्र कैसा चल रहा है। इसलिए जनता को सरकार के हर पक्ष से सब कुछ जानने का अधिकार है। चाहे मुद्दा उससे प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा हो या न जुड़ा हो। इसलिए दिल्ली में भी रहने वाला कोई व्यक्ति तमिलनाडू से जुड़ी कोई भी सूचना मांग सकता है।

किसी सरकारी विभाग में रुके हुए कार्य के विषय में सूचना के लिए आवेदन (राशनकार्ड, पासपोर्ट, वृद्धवस्था पेंशन, आयु-जन्म-मृत्यु-आवास आदि प्रमाण पत्र बनवाने या इन्कम टैक्स रिफण्ड मिलने में देरी होने, रिश्वत मांगने या बिना वजह परेशान करने की स्थिति में निम्न प्रश्नों के आधार पर सूचना के अधिकार का आवेदन तैयार करें)

आप और अधिक जानकारी के लिए http://rti.gov.in/ पर जाकर देख सकते हैं

Jai Hind!

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