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बैंकिंग रेगुलेशन (एमेंडमेंट) बिल 2017 क्या है ? | Banking Regulation Amendment Bill 2017 in Hindi


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बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक पारित किया, जो प्रमुख बैंकों के ऋण डिफॉल्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक को अन्य बैंकों को निर्देश देने में सक्षम बनाता है। …

बैंकिंग रेगुलेशन बिल 2017 दोनों सदनों में पारित कर दिया गया है. यह बिल बजट सत्र के समय मई 2017 में पारित किये गये बिल के स्थान पर लाया गया है. लोकसभा में यह बिल भारतीय राजनीती के चर्चित चेहरे अरुण जेटली जी ने पेश किया था।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को डूबे ऋणों से राहत दिलाने के लिए रिजर्व बैंक को व्यापक नियामक अधिकार देने संबंधित बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2017 गुरुवार को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया।

क्या है बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक | What Is Banking Regulation Amendment Bill In Hindi

नये कानून के तहत रिजर्व बैंक को यह अधिकार मिल जायेगा कि वह फंसे कर्ज की वसूली के लिये जरूरी कारवाई शुरू करने संबंधी निर्देश बैंकों को दे सके। विधेयक को अरुण जेटली ने सदन के पटल पर रखा था। मई 2017 में इससे संबंधित अध्यादेश को दोबारा जारी किया गया था।

बैंकिंग रेगुलेशन बिल क्या करेगा (Bank Regulation Bill Works)

इस बिल के पारित हो जाने के बाद सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक को लोन डिफाल्टरों के साथ सख्ती से पेश आने की छुट देगी. यह बिल बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के बिल में नए प्रावधान के साथ सामने आया है, जिसके अंतर्गत इन्हें ‘स्ट्रेस्ड एसेट्स’ के खिलाफ कार्यवाही करने का मौक़ा प्राप्त होगा. केंद्र सरकार आरबीआई को यह क्षमता जल्द ही प्रदान कर सकता है कि आरबीआई देश भर के सभी बैंकों को ‘स्ट्रेस्ड एसेट्स’ पर कड़ी कार्यवाही करने का निर्देश दे सके. यह प्रक्रिया Bankruptcy Code, 2016 के अधीन की जाएगी। आरबीआई इसके लिए अलग से एक कमिटी का गठन कर सकती है।

बैंकिंग रेगुलेशन बिल की पृष्ठभूमि (Bank Regulation Bill Background)

बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट अध्यादेश 4 मई को लाया गया, ताकि तात्कालिक समय में बैंक द्वारा झेले जा रहे उच्च स्तरीय परेशानियों को हल किया जा सके. आरबीआई ने जून के महीने में 12 ऐसे डिफाल्टरों की पहचान की, जिनके नाम पर समस्त भारत के एनपीए (non-performing assets) का 25% मौजूद है. एनपीए वह लोन होता है, जिस पर लोन लेने वाले ने लगातार 90 दिनों तक न तो कोई ब्याज भरा है और न ही मूलधन का कोई हिस्सा. अरुण जेटली के इस बिल को पारित कराते समय यह कहा कि इस बिल के अंतर्गत एनपीए पर कार्यवाही का आरम्भ इन्हीं 12 लोगों से किया जाएगा, इसके बाद अन्य ऐसे लोगों पर भी कार्यवाही की जायेगी।

जेटली के अनुसार एनपीए (NPA) की शुरुआत UPA सरकार के दौरान ही हो गयी थी. इस समय अधिकांश एनपीए स्टील, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल, पॉवर, टेक्सटाइल आदि क्षेत्रों में मौजूद है. इस वजह से 24 जुलाई 2017 को बैंकिंग रेगुलेशन बिल लोकसभा में पारित किया गया।

विपक्ष की प्रतिक्रिया (Opposition Reaction to Bank Regulation Act)

“जब अरुण जेटली से इस बिल को जल्द पास करने का कारण पूछा गया, तब उन्होंने कहा कि यह जल्दीबाज़ी में लिया गया निर्णय नहीं है, हम लोगों ने हालाँकि बहुत देर कर दिया फैसला लेने में”. तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय के अनुसार ये सरकार का बेचैनी भरा निर्णय है।

बैंकिंग रेगुलेशन बिल आवश्यकता क्यों पड़ी ? (Banking Regulation Bill Requirement)

  • गौरतलब है कि भारतीय रिज़र्व बैंक सिर्फ एक नियामक संस्था भर नहीं है बल्कि यह सार्वजनिक ऋण प्रबंधन जैसे अन्य कार्य भी करता है.
  • भारत के कुछ बैंक बड़े डिफॉल्टरों एवं गैर-निष्पादित संपत्तियों की समस्या से जूझ रहे हैं। अतः सरकार बैंकों को उनके प्रमुख डिफॉल्टरों के खिलाफ ऋण वसूली के लिये उचित कार्रवाई करने की क्षमता प्रदान करना चाहती है.
  • ऋण वसूली के लिये पहले से मौजूद नियमों में समय अधिक लगता था। नई समानांतर व्यवस्था अब अधिक प्रभावी होगी.

बैंकिंग रेगुलेशन बिल की विशेषताएँ (Banking Regulation Bill Features)

बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं..

  • इस बिल के अंतर्गत सभी एनपीए पर सख्त कार्यवाही की जायेगी, जिसकी देख रेख की जिम्मेदारी केंद्र सरकार ने आरबीआई को दी है.
  • यह बिल बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 का एक संशोधित रूप है. इस संशोधित रूप के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक सभी एनपीए पर कार्यवाही कर सकता है.
  • इस बिल के आने से आरबीआई एनपीए के लिए सशक्त हो सकेगी और उन लोगों पर कार्यवाही कर सकेगी, जो ऋण नहीं चुका पा रहे.
  • यह बिल भारतीय स्टेट बैंक के साथ साथ अन्य क्षेत्रीय रूरल बैंक पर लागू होगा.

इस अध्यादेश से यह उम्मीद है कि यह एनपीए , बैड लोन, तथा स्ट्रेस्ड परिसम्पत्तियो के समाधान के  गितिविधियों को तीव्रता देगा. और यह बैंक कर्मियों को आरबीआई द्वारा स्थापित  निगरानी समिति का सहयोग भी देगा ताकि  स्ट्रेस्ड संपत्तियों की संकल्प प्रतिक्रिया में को रुकावट न आये।

बैंकों द्वारा ऋण प्रदान करने में कोई बुराई नहीं है। यह बैंकिंग वित्त की बदौलत ही है कि देश में कारोबार का विस्तार हुआ है, रोज़गार के अनेक अवसर पैदा हुए हैं और अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी है। अतः इस दृष्टि से बैंकों द्वारा ऋण दिया जाना आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि डूबे हुए कर्जों में से 25 प्रतिशत हिस्सा केवल 12 बड़े कर्जदारों का है। इस मामले में आरबीआई ने प्रक्रिया शुरू कर दिया है। आगे इसके शिकंजे में और भी बड़े लोग आएंगे। बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2017 में बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में संशोधन करने का प्रावधान है। यह बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2017 की जगह लेगा। I Love My India जय हिंद।

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