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स्वदेशी अपनाओ, चीनी सामान का बहिष्कार करें और देश को बचाने में सहयोग करें | Boycott Chinese Products & Help India


क्या है भारत चीन डोकाला सीमा विवाद, जानिए…

boycott products made in china

चीन वैसे तो भारत का दोस्त होने का दम भरता है, मगर मौका पाते ही भारत के खिलाफ खड़ा हो जाता है तथा पाकिस्तान को आतंकवाद को लेकर बढ़ावा देने उसकी नीति रही है। चीन की दोगली नीतियों का जवाब देने के लिए हर भारतीय का फर्ज बनता है कि वे चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करे ताकि चीन को सबक सिखाया जा सके। …

वर्तमान में चीनी उत्पादों का बहिष्कार जैसे स्लोगन को इंटरनेट के माध्यम से लोगों तक फैला कर चीन में निर्मित वस्तुओं के उपयोग को रोकने के लिए नारा दिया जा रहा है. भारत, फिलीपींस और वियतनाम सहित अन्य देश भी चीनी माल का बहिष्कार करने के लिए लोगों से आह्वान कर रहे है लेकिन पूर्ण बहिष्कार इन्हीं देशों के लिए मुश्किल हो रहा है।

चीन निर्मित उत्पादों का करें बहिष्कार | Boycott Chinese Goods in Hindi

मसूद अजहर प्रकरण के बाद इस विरोध को और हवा मिली। जाहिर है पाकिस्तान और उसके आतंकियों को समर्थन देने के चीन के रूख ने उसके खिलाफ भारत में माहौल बनाया है। आखिर कुछ भी हो भारत का बाजार वैश्विक पैमाने में जबरदस्त है। यों चीन के लिए पूरी दुनिया ही बाजार है।

भारत में ग्राहकों की संख्या और उसकी बढ़ती खरीदी ताकत का चीन को अहसास है। यदि भारत के लोग अगले तीन महीनों में चीनी सामान का सचमुच बहिष्कार करें तो वह भी सोचने को मजबूर होगा। नागरिकों में अपने आप चीन के खिलाफ माहौल बना है। लोगों में सोशल मीडिया में यह दलील चल पड़ी है कि हमें चीन की पीठ पर नहीं, बल्कि पेट पर लात मारनी होगी, इसी से वह भारत का महत्व समझेगा।

चीन के सामान का करें बहिष्कार

केंद्र सरकार चीन के सामान के आयात को नहीं रोक सकती पर हम लोग खुद चीन का सामान खरीदना बंद कर दें और स्वदेशी अपनाए तो अपने आप चीन की अर्थव्यवस्था हिल जाएगी। इसलिए जब हम लोग चीन के सामान का बहिष्कार करेंगे तो चीन की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होगा। यह करना इसलिए जरूरी है कि आज चीन पाकिस्तान का परोक्ष व अपरोक्ष रूप से सहयोग कर रहा है। कभी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी रोककर तो कभी पाकिस्तानी आतंकियों का समर्थन करके।

इसलिए भारत की जनता को अब चीन को सबक सिखाने के लिए उसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए और चीनी सामानों का बहिष्कार करना चाहिए।

"चीन को सबक सिखाने के लिए चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करे हर भारतीय" इन दिनों सोशल मीडिया पर ‘ड्रैगन’ के बहिष्कार के अभियान जोरो पर है और हम सबको इसका साथ देना चाहिए.. स्वदेशी अपनाओ, चीन निर्मित उत्पाद का बहिष्कार करे और भारत की अर्थव्यवस्था को ड्रैगन से बचाने में सहयोग दें..

चीनी उत्पादों का बहिष्कार और उसका कारण (Boycott Chinese Products Causes)

इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं :

  • चीन जनसंख्या की दृष्टी से विश्व का सबसे बड़ा देश है, साथ ही चीन की सीमा का एक बड़ा हिस्सा कई देशों की सीमा को छूता है. चीन की नीतियों की वजह से इसके पड़ोसी देशों के साथ हमेशा सीमा विवाद को लेकर समस्या बनी रहती है, इस वजह से भी चीनी उत्पादों का बहिष्कार किया जाता है.
  • 1949 में चीनी कम्युनिस्टों ने चीन का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया. 1980 के दशक के बाद से चीनी नेताओं ने अपनी पहली प्राथमिकता में चीन को आर्थिक रूप से दृढ़ करने का निश्चय किया और इसके लिए उन्होंने बाजार की मांग के अनुरूप कम गुणवता वाले सस्ते माल का निर्माण कर उपभोक्ता को बेचना शुरू कर दिया. कम भुगतान कर और आवश्यकता की पूर्ति हो जाये तो ये बात सभी को पसंद आना स्वाभाविक है जिस वजह से लोगों का आकर्षण चाइना में निर्मित माल की तरफ हमेशा बना रहता है.
  • 2008 के चीनी दूध घोटाले के बाद चीन के लोग भी वहां के दूध उत्पादों पर भरोसा नहीं कर पाते है, हालाँकि चीन की सरकार खाद्य सुरक्षा और गुणवता के लिए कई सारे कानून बनाकर नियमों का पालन करने के आदेश जारी करती है.

किन किन देशों द्वारा चीनी उत्पादों का बहिष्कार (Boycott Chinese Products by Other Countries)

अलग अलग देशों में चीनी उत्पादों के बहिष्कार के लिए कदम उठाये गए हैं, उनमे से कुछ इस प्रकार हैं :

भारत : भारत और तिब्बत चीन के माल का बहिष्कार करने के लिए एक संयुक्त अभियान चलाकर दो सीमा घुसपैठ की घटनाओं को रोकने की कोशिश कर रहे है। भारतीयों द्वारा चीन का विरोध इसलिए किया जाता है क्योंकि चीन को भारत के एक प्रमुख अवरोध के रूप में देखा जाता है। हाल ही में 2016 में चीन ने भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से इनकार कर दिया, साथ ही चीन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता के लिए भारतीयों द्वारा प्रमुख अवरोधक के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा चीन पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में निवेश कर बिना किसी शर्त के पाकिस्तान का हमेशा समर्थन करता है। अगस्त-सितम्बर 2016 में भारत पर हुए उरी हमलों के बाद जब भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष की स्थिति बनी तब भी चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया, जो भारत में चीनी उत्पादों के बहिष्कार अभियान के लिए प्रेरणा बन गयी। इससे भारत में कई दुकानों ने भी चीनी माल का बहिष्कार कर उसे बेचना छोड़ दिया। इस तरह के बहिष्कार का मकसद हमेशा से चीन को आर्थिक नुकसान पहुँचाने से रहा है।

फिलीपिंस : इस देश के कई राष्ट्रीय समूहों ने राष्ट्रव्यापी अभियान चलाकर चीनी उत्पादों का बहिष्कार सफलतापूर्वक किया है. अल्बे के गवर्नर जोये सलसेदा ने भी 2012 में हुए आइलैंड विवाद के बाद फिलीपींस को चीन उत्पादित वस्तुओं के बहिष्कार में अपना समर्थन दिया था।

वियतनाम : हैयांग शियो 981 गतिरोध के मामले के साथ दक्षिण चीन सागर में विवादित क्षेत्र के बारे में तनाव को लेकर वियतनाम में चीनी माल का बहिष्कार शुरू हुआ. वहां मेड इन वियतनाम माल के उपयोग को लेकर लोगों को प्रोत्साहित किया गया।

तिब्बत : तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए दलाई लामा के भाई प्रोफेसर थम्पटन नोरबू ने चीन के कम गुणवता और असुरक्षित उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान करते हुए, इस अभियान में शामिल होने के लिए जनता से और अन्य भी देशों से समर्थन की अपील की है।

चीनी सामान खरीदना मतलब दुश्मन की मदद करना

चीन में बने सामान का बहिष्कार करने की आवाज उठाने वालों में योग गुरु रामदेव भी शामिल हैं, उन्होंने चीनी समान खरीदने को दुश्मन की मदद करना बताया है। लेकिन रामदेव के बयान का मकसद अपनी कंपनी पतंजलि को उत्पादों को बढ़ावा देना भी हो सकता है, जिसने हाल के सालों में कई तरह के उत्पाद भारतीय बाजार में उतारे हैं. कई लोगों ने ट्विटर पर रामदेव से कहा है कि वे चीनी समान का बहिष्कार तो करें दें लेकिन भारत में सस्ते चीनी समान का कोई विकल्प नहीं है।

क्या हमे चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए (Should We Boycott Chinese Products)

भारत और चीन व्यापारिक साझेदार है. भारत-चीन व्यापार की मात्रा लगभग 71 बिलियन अमेरिकी डॉलर है. नवीनतम डाटा के अनुसार 2016 में चीन से भारत का आयात 58.33 बिलियन था, जबकि भारत से चीन के लिए निर्यात केवल 11.76 बिलियन था जो भारत के व्यापारिक घाटे को दर्शाती है. चीन के साथ व्यापार हमारे देश को प्रभावित कर रहा है। भारत चीन से संचार उपकरणों के अलावा तपेदिक और कुष्ठ रोग की दवा, एंटीबायोटिक दवायें, बच्चों के खिलौने, बॉल बेयरिंग, एलसीडी, एलईडी, सेट टॉप बॉक्स और टीवी रिमोट इत्यादि का आयात करता है। और कपास, तांबा, पेट्रोलियम इत्यादि का निर्यात करता है।

चीन हमारा दोस्त राष्ट्र नहीं है, भारत, चीन द्वारा पाकिस्तान को समर्थन देने से नाराज होकर ही नहीं बल्कि भारत – चीन डोकलाम विवाद की वजह से चीनी उत्पादों का बहिष्कार कर रहा है. लेकिन इस बहिष्कार की सफलता में संशय बना हुआ है क्योकि कभी भी जब बहिष्कार होता है तो छोटे चाइनीज बल्ब, पटाखे इत्यादि का होता है, जबकि पुरे भारत में टीवी, रेफ्रिजरेटर और स्मार्ट फ़ोन का बाजार लगभग चीनी बहुराष्ट्रीय कंपनीयों के कब्जे में है. जोकि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत विशाल राजस्व उत्पन्न करता है. लोग लेनोवो, क्सिओमी जैसे स्मार्ट फ़ोन और लैपटॉप का विरोध कभी भी नहीं कर पाते, इन उत्पादों के प्रति मोह बना रहता है। इसलिए हमें ये मोह त्याग कर चीनी माल का बहिष्कार करना चाहिए।

सभी राष्ट्रभक्तों से विनती है इस वर्ष अपने पवित्र त्योहारों पर चीन निर्मित उत्पादों- पटाखों, लाइट, मूर्तिया, मिठाई, खिलोने आदि का पूर्ण बहिष्कार करे। स्वदेशी अपनाओ – विदेशी भगाओ

चीनी उत्पाद का बहिष्कार पर हिंदी स्लोगन (Slogans on Boycott Chinese Products)

  1. स्वदेशी उत्पादक आगे आओ । भारत को आत्मनिर्भर बनाओ ॥
  2. चीनी सामान का पर्याय निकालो । स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दो ॥
  3. मेड इन चाइना को है सबक सिखाना । स्वदेशी चीज़ों को होगा अपनाना ॥
  4. ग्राहकों अब भी जाग जाओ । सही – गलत का तर्क लगाओ ॥
  5. मेरा है यही सपना । आत्मनिर्भर बनें देश अपना ॥
    देश ही में बने ऐसे उत्पाद । की मेड इन चाइना से भी अच्छी रहे निर्यात ॥
  6. स्वदेशी चीजों को खरीदिये, देश को सुदृढ़ कीजिये ॥
  7. भगवान न करे की आगे भी कभी ऐसी स्थिति आये, की हमसे मुनाफा कमाकर कोई हम ही पर उंगली उठाये।
  8. देश के नागरिक दे रहे हैं मुह तोड़ जवाब, ग्राहक शक्ति क्या होती है यह जान जायेगा मेड इन चाइना आज ।

बहिष्कार तभी सफ़ल हो सकता है जब हम भी कम कीमत और अच्छी गुणवता की वस्तुओं का विकल्प उपभोक्ता को प्रदान कर पायें. मेक इन इण्डिया को सफल बनाते हुए और अपनी राष्ट्रीयता का परिचय देते हुए पूरी तरह से चाइनीज निर्मित वस्तुओं का त्याग कर दें। जय हिंद।

चीनी उत्पादों का बहिष्कार कर भारत का पैसा चीन जाने से रोके, सेना सीमा को बचा रही है तो आप भारतीय पैसे को चीन जाने से बचाइए, कृपया इस पोस्ट को देशहित में शेयर जरूर करें !!

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