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जीएसटी में कम्पोजीशन स्कीम क्या हैं? छोटे व्यापारियों के लिए इसके फायदे | GST Composition Scheme for Small Bussnessman in Hindi


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GST composition scheme for small bussinessman

इस स्कीम के तहत केवल वे व्यापारी पंजिकृत (registration) कर सकते है जिनका वार्षिक कारोबार 75 लाख रुपये से कम है। कम्पोजीशन स्कीम (Composition Scheme) केवल अंतर-राज्य सामानों के सप्लायर के लिए उपलब्ध है। अगर कोई व्यापारी अंतरराज्यीय ब्यापार में शामिल है, तो वह इस योजना के लिए विकल्प नहीं चुन सकता। …

हर छोटा व्यापारी व कई बड़े व्यापारी भी अपनी-अपनी योजना अनुसार जीएसटी कम्पोजीशन में रजिस्ट्रेशन करवाकर 1% या 2% कम्पोजीशन लेवी (फीस) भरना चाहते है. जेसा कि पहले भी लिखा गया है, कम्पोजीशन स्कीम जितनी सरल दिख रही है, उतनी सरल नहीं है बल्कि इससे सम्बंधित प्रावधानों व नियमो के अध्ययन से पता चलता है कि कुछ शर्ते बहुत ही गंभीर या कठिन है।

जीएसटी के अंतर्गत कम्पोजीशन स्कीम | Composition Scheme Under GST

भारत सरकार ने भारत के टैक्स सिस्टम को बेहतर और आसान बनाने के लिए जीएसटी बिल की शुरुआत की है, किन्तु किसी भी टैक्स सिस्टम में सिस्टम अपने बकाया टैक्स को वापस पाने का प्रयास करती है. साथ ही सिस्टम को इस तरह से निर्मित किया जाता है कि आने वाले समय में सभी लोग सरल रूप से रिटर्न भर सकें और अपने रिकॉर्ड को लगातार बनाए रखें. हालाँकि ये सभी प्रक्रिया भी छोटे छोटे व्यापारियों के लिए काफ़ी चुनौतीपूर्ण होती है. इस समस्या के निदान के लिए कम्पोजीशन स्कीम को स्टेट वैट के अंतर्गत लाया गया है. जीएसटी कम्पोजीशन में इन्हीं सब सुविधाओं को लाया गया है, इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति सरकार द्वारा तय किये गये टर्नओवर के ऊपर आसानी से टैक्स जमा कर सकेगा. यहाँ पर इससे सम्बंधित विशेष तथ्यों का वर्णन किया जा रहा है।

जीएसटी में कम्पोजीशन स्कीम की शर्तें और टैक्सेबल व्यक्ति (GST Composition Scheme Terms & Taxable Persons)

जीएसटी कम्पोजीशन स्कीम की प्रमुख शर्तें निम्न है..

  • जीएसटी के अंतर्गत इस स्कीम की सुविधा केवल उन लोगों को प्राप्त होगी, जिन्होंने जीएसटी के लिए अपना पंजीकरण कराया है.
  • व्यक्ति का कुल वार्षिक टर्नओवर किसी भी फाइनेंसियल इयर के दौरान 75 लाख से अधिक नहीं होना चाहिए.
  • नीचे दिए गये व्यापारों या पंजीकृत व्यक्तियों को उनके द्वारा दिये गए टेक्स पर जीएसटी कम्पोजीशन लेवीय का हक नहीं है.
  1. मानव उपभोग के लिए भोजन की आपूर्ति में लगे व्यक्ति के अलावा अन्य सेवाओं में लगे व्यक्ति कम्पोजीशन लेवीय के योग्य नहीं होंगे.
  2. निम्न सामानों की आपूर्ति करने वाले व्यक्ति इस अधिनियम के तहत टेक्स के लिए लेवीय नहीं है –
  3. पेट्रोलियम क्रूड
  4. हाई स्पीड डीजल
  5. मोटर स्पिरिट
  6. नेचुरल गैस
  7. एविएशन टरबाइन फ्यूल
  8. व्यक्ति के पीने के लिए अल्कोहल
  9. इंटरस्टेट गुड्स सप्लाई करने वाले व्यक्ति
  10. वैसे व्यापारी जो ई कॉमर्स की सहायता से व्यापार करते हैं, और जिनका टैक्स सेक्शन 52 के अंतर्गत आता है.
  11. ऐसे व्यक्ति जो इस तरह के सामान के निर्माता हैं, जिनकी परिषद द्वारा सिफारिश की गई है.

जीएसटी कम्पोजीशन लेवी का ब्याज दर (GST Composition Scheme Interest Rate)

जीएसटी कम्पोजीशन लेवी का ब्याज दर निम्न है..

  • स्टेट और यूनियन टेरिटरी में व्यापर के दौरान निर्माता के लिए होने वाले कुल टर्नओवर का 1%.
  • स्टेट अथवा यूनियन टेरिटरी के दौरान यदि कोई व्यक्ति सप्लाई के ज़रिये व्यापार करते हुए पैसा कमाता है, तो उस पर कुल टर्नओवर का 2.5%. यह दर किसी भी तरह के पेय के सप्लाई करने वाले पर लगेगा.
  • अन्य तरह की सप्लाई पर सप्लायर को कुल टर्नओवर का 0.5% देने की आवश्यकता होगी.

जीएसटी कम्पोजीशन स्कीम के फ़ायदे (GST Composition Scheme Merits)

इस स्कीम की विभिन्न मेरिट का वर्णन नीचे किया जा रहा है.

  • अनुपालन सीमा (लिमिटेड कंप्लायंस) : कम्पोजीशन लेवी के दौरान रिटर्न फर्निशिंग अपेक्षाकृत कम कंप्लायंस का होता है. साथ ही मेंटेनेंस आदि में कम समय लगता है, जिस वजह से व्यक्ति व्यापार में अधिक ध्यान दे पाटा है.
  • टैक्स लायबिलिटी की सीमा : नियमित टैक्सपेयर की तुलना में इसका दर भी बेहद कम है. इस टैक्स के दौरान व्यक्ति को 18% स्टैण्डर्ड टैक्स की जगह पर केवल 2.5% का ब्याज देना होता है.
  • लिक्विडिटी : अकसर आम टैक्सपेयर इस बात की वजह से भी टैक्स नहीं देते हैं, कि दर काफ़ी अधिक होता है. उसके स्थान पर कम्पोजीशन लेवी के अंतर्गत यह दर कम रखा गया है. अतः इस टैक्स के अंतर्गत अपना नाम पंजीकृत कराये लोगों को कम टैक्स देने की आवश्यकता होगी.
  • व्यवसायों को हर महीने 3 Return की जगह तीन महीने में केवल एक बार quarterly return (त्रेमासिक रिटर्न) फाइल करना होगा.
  • व्यवसायों को कम दर से टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा.
  • कम्पोजीशन स्कीम के व्यवसायों के लिए Detailed Invoice की आवश्यकता नहीं होगी केवल the bill of supply ही काफी होगा.
  • छोटे व्यवसायों को Return में HSN कोड की जानकारी नहीं देनी पड़ेगी.
  • GST से सम्बंधित अन्य Compliance भी आसान होगी.

कंप्लायंस सम्बंधित बातें (GST Composition Compliance)

एक आम टैक्स डाटा को महीने में कम से कम 3 रिटर्न भरने की आवश्यकता होती है. साथ ही उन्हें वर्ष में एक बार पुनः टैक्स रिटर्न भरने की आवश्कयता भी होती है. यदि व्यक्ति ऐसा नही कर सकता है, तो उसे पेनल्टी भी देने की आवश्यकता होती है. इस टैक्स स्कीम में अंतर्गत किसी टैक्स दाता को प्रत्येक 3 महीने में केवल एक बार रिटर्न भरने की आवश्यकता होगी. इस तरह से टैक्स रिकॉर्ड को आसानी से रखा जा सकेगा और व्यक्ति अपने व्यापार पर अच्छे से ध्यान दे सकेगा. इस टैक्स लेवी के अंतर्गत व्यक्ति को रेगुलर टैक्स दर के अनुसार भी टैक्स नहीं जमा करना पड़ेगा. इस तरह से टैक्स देने वाले को कई तरह की आसानी प्राप्त हो सकेगी।

स्ट्रिक्ट पीनल प्रोवीजन (Strict Pinal Provision)

इस टैक्स लेवी के अंतर्गत सभी तरह के व्यापारी अपना पंजीकरण नहीं करा सकते. अतः जो भी व्यक्ति इस टैक्स लेवी के अंतर्गत नहीं आएगा उसे नियमित रूप से सभी तरह के टैक्स भरने की आवश्यकता होगी. इस वजह से किसी भी व्यक्ति को अपने व्यापार को इसके अंतर्गत पंजीकृत कराने से पहले सभी बातो को अच्छे से समझ लेने की आवश्यकता है. सरकार द्वारा तय किये गये व्यापार ही इसके अंतर्गत पंजीकृत कराये जा सकेंगे. ऊपर उन सभी व्यापारों की सूची दी गयी है, जो जीएसटी कम्पोजीशन लेवी के अंतर्गत अपना व्यापार पंजीकृत करा सकते हैं।

कम्पोजीशन टैक्स लेवी की सीमायें - कम्पोजीशन स्कीम के नुकसान (GST Composition Scheme Demerits)

इस टैक्स प्रणाली की हालाँकि कुछ सीमायें भी हैं, जिस वजह से सभी तरह के टैक्स दाताओं को इसका लाभ नहीं प्राप्त हो सकेगा. यहाँ पर इस टैक्स से सम्बंधित सीमओं का वर्णन किया जा रहा है।

  • कम्पोजीशन डीलर ऑनलाइन माल नहीं बेच सकेगा : जो भी व्यापारी कम्पोजीशन में जाएगा, वह अमेजन या फ्लिफकार्ट जेसी कंपनियों के मार्फ़त ऑनलाइन माल सेल नहीं कर सकेगा (लेकिन प्योरमाल जेसी निशुल्क वेबसाइट के जरिये अपने राज्य के अन्दर ऑनलाइन माल बेच सकेगा).
  • व्यापारिक क्षेत्र की सीमायें : इस टैक्स के अंतर्गत अपना व्यापार पंजीकृत कराने वाले व्यापारी केवल इंटरस्टेट लेनदेन ही कर सकेंगे. इस टैक्स के अंतर्गत पंजीकृत व्यापारियों को आयात निर्यात करने का मौक़ा प्राप्त नहीं हो सकेगा.
  • इनपुट टैक्स पर किसी तरह की क्रेडिट नहीं : B2B ट्रांसक्शन के अंतर्गत किसी भी तरह का इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं प्राप्त हो सकता है. अतः यदि कोई व्यापारी इस मॉडल की सहायता से अपना व्यापार करता है, तो उसे आउटपुट लायबिलिटी के तहत इनपुट टैक्स पर किसी तरह का टैक्स क्रेडिट प्राप्त नहीं हो सकेगा. इस स्कीम के अंतर्गत कोई भी व्यापारी यदि किसी रेगुलर टैक्सेबल डीलर से सामान ख़रीदता है, तो भी उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा.
  • टैक्स कलेक्शन : इसके अंतर्गत टैक्स दर बहुत ही कम है किंतु इसे नियमित रूप से भुगतान करने के लिए टैक्स पेयर को सेल की लागत बढाने की आवश्यकता होती है.
  • कम्पोजीशन स्कीम का गलत क्लेम : यदि किसी भी व्यापारी ने कम्पोजीशन स्कीम का गलत आप्शन लिया है या कम्पोजीशन शर्तो का उल्लंघन किया है और वो जांच में पकड़ा जाता है तो उसका कम्पोजीशन का आप्शन तो समाप्त होगा ही, उसे पूरा टैक्स व भारी पेनल्टी भी देनी होगी.
  • कम्पोजीशन लेवी (फीस) अपनी जेब से देनी होगी : कम्पोजीशन डीलर को कम्पोजीशन लेवी (1%, 2% और 5%) अपनी जेब से भरनी होगी, उसे ग्राहक से वसूल नहीं किया जा सकेगा.

व्यवसायों के लिये कम्पोजीशन स्कीम एक विकल्प हैं जिनका उपयोग वे चाहें तो कर सकते हैं नहीं तो वे सामान्य टैक्स व्यवस्था की पालना कर सकते हैं| इसलिए कम्पोजीशन स्कीम को चुनते समय अच्छे से विश्लेषण कर लेना चाहिए क्योंकि इस स्कीम का सबसे बड़ा नुकसान यह हैं कि आप ख़रीदे गए माल पर चुकाए गए GST की Input Credit नहीं ले सकते| इसके साथ साथ आप बिल में भी GST अलग से नहीं दिखा सकते इसलिए आपके Customer भी आपके द्वारा बेचे गए माल पर इनपुट क्रेडिट का लाभ नहीं ले सकेंगे।

Composition Scheme के व्यवसाय को कौन से GST Return फाइल करने होते हैं और उसकी Due Date क्या है?

कम्पोजीशन स्कीम के व्यवसायों को वर्ष में कुल 5 Return फाइल करने होंगे जिसमें से 4 Return त्रेमासिक और 1 Return वार्षिक होगा:-

GSTR-4 (त्रैमासिक विवरण – Quarterly ) – तीन महीने समाप्ति के अगले महीने की 18 तारीख

GSTR – 8 (वार्षिक विवरण – Annual) – अगले वित वर्ष के 31 दिसंबर

ज्यादात्तर व्यवसायों के लिए कम्पोजीशन स्कीम फायदेमंद ही होती हैं क्योंकि इसमें बहुत ही कम रेट से टैक्स देना होता हैं| लेकिन कुछ व्यवसाय जिनके Input credit की मात्र अधिक होती हैं या फिर वे आगे Credit pass on करना चाहते हैं उनके लिए यह स्कीम नुकसानदायक भी हो सकती हैं। I Love My India जय हिंद।

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