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5 जून विश्व पर्यावरण दिवस, जागरूकता से ही बचेगा पर्यावरण | International Environment Day - #WorldEnvironmentDay


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पर्यावरण दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकृति को समर्पित दुनियाभर में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा उत्सव है। पर्यावरण और जीवन का अटूट संबंध है फिर भी हमें अलग से यह दिवस मनाकर पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लेने की आवश्यकता है। यह बात चिंताजनक ही नहीं, शर्मनाक भी है।.. …

विश्व पर्यावरण दिवस – 2017 | World Environment Day in Hindi

विश्व पर्यावरण दिवस को पर्यावरण दिवस और ईको दिवस के नाम भी जाता है। ये वर्षों से एक बड़े वार्षिक उत्सवों में से एक है जो हर वर्ष 5 जून को अनोखे और जीवन का पालन-पोषण करने वाली प्रकृति को सुरक्षित रखने के लक्ष्य के लिये लोगों द्वारा पूरे विश्व भर में मनाया जाता है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2017

विश्व पर्यावरण दिवस 2017 पूरे विश्व भर के लोगों के द्वारा 5 जून, सोमवार को मनाया जायेगा।

पूरे विश्व में आम लोगों को जागरुक बनाने के लिये साथ ही कुछ सकारात्मक पर्यावरणीय कार्यवाही को लागू करने के द्वारा पर्यावरणीय मुद्दों को सुलझाने के लिये, मानव जीवन में स्वास्थ्य और हरित पर्यावरण के महत्व के बारे में वैश्विक जागरुकता को फैलाने के लिये वर्ष 1973 से हर 5 जून को एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में विश्व पर्यावरण दिवस (डबल्यूईडी के रुप में भी कहा जाता है) को मनाने की शुरुआत की गयी जो कि कुछ लोगों, अपने पर्यावरण की सुरक्षा करने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार या निजी संगठनों की ही नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है ।

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्टॉकहोम (स्वीडन) में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया।

इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ तथा प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके नागरिकों को प्रदूषण की समस्या से अवगत कराने का निश्चय किया गया। तथा इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था।

1972 में संयुक्त राष्ट्र में 5 से 16 जून को मानव पर्यावरण पर शुरु हुए सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र आम सभा और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनइपी) के द्वारा कुछ प्रभावकारी अभियानों को चलाने के द्वारा हर वर्ष मनाने के लिये पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस की स्थापना हुयी थी। इसे पहली बार 1973 में कुछ खास विषय-वस्तु के “केवल धरती” साथ मनाया गया था। 1974 से, दुनिया के अलग-अलग शहरों में विश्व पर्यावरण उत्सव की मेजबानी की जा रही है।

कुछ प्रभावकारी कदमों को लागू करने के लिये राजनीतिक और स्वास्थ्य संगठनों का ध्यान खींचने के लिये साथ ही साथ पूरी दुनिया भर के अलग देशों से करोड़ों लोगों को शामिल करने के लिये संयुक्त राष्ट्र आम सभा के द्वारा ये एक बड़े वार्षिक उत्सव की शुरुआत की गयी है।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 19 नवंबर 1986 से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ। उसके जल, वायु, भूमि - इन तीनों से संबंधित कारक तथा मानव, पौधों, सूक्ष्म जीव, अन्य जीवित पदार्थ आदि पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस क्यों मनाया जाता है

बड़े पर्यावरण मुद्दें जैसे भोजन की बरबादी और नुकसान, वनों की कटाई, ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ना इत्यादि को बताने के लिये विश्व पर्यावरण दिवस वार्षिक उत्सव को मनाने की शुरुआत की गयी थी। पूरे विश्वभर में अभियान में प्रभाव लाने के लिये वर्ष के खास थीम और नारे के अनुसार हर वर्ष के उत्सव की योजना बनायी जाती है।

पर्यावरण संरक्षण के दूसरे तरीकों सहित बाढ़ और अपरदन से बचाने के लिये सौर जल तापक, सौर स्रोतों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन, नये जल निकासी तंत्र का विकास करना, प्रवाल-भिति को बढ़ावा देना और मैनग्रोव का जीणोंद्धार आदि के इस्तेमाल के लिये आम लोगों को बढ़ावा देना, सफलतापूर्वक कार्बन उदासीनता को प्राप्त करना, जंगल प्रबंधन पर ध्यान देना, ग्रीन हाउस गैसों का प्रभाव घटाना, बिजली उत्पादन को बढ़ाने के लिये हाइड्रो शक्ति का इस्तेमाल, निम्निकृत भूमि पर पेड़ लगाने के द्वारा बायो-ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये इसे मनाया जाता है।

विश्व पर्यावरण दिवस अभियान के कुछ लक्ष्य यहाँ दिये गये हैं:

  • पर्यावरण की गुणवत्ता के संरक्षण हेतु सभी आवश्यक क़दम उठाना।
  • पर्यावरण प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और उपशमन हेतु राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम की योजना बनाना और उसे क्रियान्वित करना।
  • पर्यावरण की गुणवत्ता के मानक निर्धारित करना।
  • पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित अधिनियमों के अंतर्गत राज्य-सरकारों, अधिकारियों और संबंधितों के काम में समन्वय स्थापित करना।
  • ऐसे क्षेत्रों का परिसीमन करना, जहाँ किसी भी उद्योग की स्थापना अथवा औद्योगिक गतिविधियां संचालित न की जा सकें, आदि- आदि। उक्त-अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है।
  • पर्यावरण मुद्दों के बारे में आम लोगों को जागरुक बनाने के लिये इसे मनाया जाता है।
  • विकसित पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों में एक सक्रिय एजेंट बनने के साथ ही साथ उत्सव में सक्रियता से भाग लेने के लिये अलग समाज और समुदाय से आम लोगों को बढ़ावा देते हैं।
  • उन्हें जानने दो कि पर्यावरणीय मुद्दों की ओर नकारात्मक बदलाव रोकने के लिये सामुदायिक लोग बहुत जरुरी हैं।
  • सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक सुखी भविष्य का आनन्द लेने के लिये लोगों को अपने आसपास के माहौल को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिये प्रोत्साहित करना चाहिये।

वर्तमान में पर्यावरण की स्थिति

आजकल 5 जून 'विश्व पर्यावरण दिवस' का आयोजन महज एक रस्म अदायगी है। भले ही इस अवसर पर बड़े-बड़े व्याख्यान दिये जाएं, हज़ारों पौधा-रोपण किए जाएं और पर्यावरण संरक्षण की झूठी क़समें खायी जाएं, पर इस एक दिन को छोड़ शेष 365 दिन प्रकृति के प्रति हमारा अमानवीय व्यवहार इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हम पर्यावरण के प्रति कितने उदासीन और संवेदन शून्य हैं? आज हमारे पास शुद्ध पेयजल का अभाव है, सांस लेने के लिए शुद्ध हवा कम पड़ने लगी है। जंगल कटते जा रहे हैं, जल के स्रोत नष्ट हो रहे हैं, वनों के लिए आवश्यक वन्य प्राणी भी विलीन होते जा रहे हैं। औद्योगीकरण ने खेत-खलिहान और वन-प्रान्तर निगल लिये। वन्य जीवों का आशियाना छिन गया। कल-कारखाने धुआं उगल रहे हैं और प्राणवायु को दूषित कर रहे हैं। यह सब ख़तरे की घंटी है।

भारत की सत्तर प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। अब वह भी शहरों में पलायन हेतु आतुर है जबकि शहरी जीवन नारकीय हो चला है। वहाँ हरियाली का नामोनिशान नहीं है, बहुमंजिली इमारतों के जंगल पसरते जा रहे हैं। शहरी घरों में कुएं नहीं होते, पानी के लिए बाहरी स्रोत पर निर्भर रहना पड़ता है। गांवों से पलायन करने वालों की झुग्गियां शहरों की समस्याएं बढ़ाती हैं। यदि सरकार गांवों को सुविधा-संपन्न बनाने की ओर ध्यान दें तो वहाँ से लोगों का पलायन रुक सकता है। वहाँ अच्छी सड़कें, आवागमन के साधान, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल व अन्य आवश्यक सुविधाएं सुलभ हों तथा शासन की कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं का लाभ आमजन को मिलने का पूरा प्रबंध हो तो लोग पलायन क्यों करेंगे ? गांवों में कृषि कार्य अच्छे से हो, कुएं-तालाब, बावड़ियों की सफाई यथा-समय हो, गंदगी से बचाव के उपाय किये जाएँ। संक्षेप में यह कि वहाँ ग्रामीण विकास योजनाओं का ईमानदारी-पूर्वक संचालन हो तो ग्रामों का स्वरूप निश्चय ही बदलेगा और वहाँ के पर्यावरण से प्रभावित होकर शहर से जाने वाले नौकरी-पेशा भी वहाँ रहने को आतुर होंगे।

पर्यावरण प्रदूषण

वायुमंडल में बड़े पैमाने पर लगातार विभिन्न घटक औद्योगिक गैसों के छोड़े जाने से पर्यावरण संतुलन पर अत्यंत विपरीत प्रभाव पड़ता रहता है। मुख्यतः पर्यावरण के प्रदूषित होने के मुख्य कारण हैं - निरंतर बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण, वाहनों द्वारा छोड़ा जाने वाला धुआँ, नदियों, तालाबों में गिरता हुआ कूड़ा-कचरा, वनों का कटान, खेतों में रसायनों का असंतुलित प्रयोग, पहाड़ों में चट्टानों का खिसकाना, मिट्टी का कटान आदि।

  • भूमि प्रदूषण :
  • जल प्रदूषण :
  • वायु और ध्वनि प्रदूषण :

विश्व पर्यावरण दिवस के थीम तथा नारे

वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय मुद्दों को बताने में बड़ी संख्या में भाग लेने के लिये पूरे विश्वभर में बड़ी संख्या में लोगों को बढ़ावा देने के द्वारा उत्सव को ज्यादा असरदार बनाने के लिये संयुक्त राष्ट्र के द्वारा निर्धारित खास थीम पर हर वर्ष का विश्व पर्यावरण दिवस उत्सव आधारित होता है।

विश्व पर्यावरण दिवस के थीम तथा नारे
क्र. सं. वर्ष थीम तथा नारे
1. 2016 थीम- "दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए दौड़ में शामिल हों।"
2. 2015 थीम- "एक विश्व, एक पर्यावरण।"
3. 2014 थीम- "छोटे द्वीप विकसित राज्य होते हैं" या "एसआइडीएस" और "अपनी आवाज़ उठाओ, ना कि समुद्र स्तर।"
4. 2013 थीम- "सोचो, खाओ, बचाओ" और नारा- "अपने फूडप्रिंट को घटाओ।"
5. 2012 थीम- "हरित अर्थव्यवस्था: क्यों इसने आपको शामिल किया है?"
6. 2011 थीम- "जंगल: प्रकृति आपकी सेवा में।"
7. 2010 थीम- "बहुत सारी प्रजाति। एक ग्रह। एक भविष्य।"
8. 2009 थीम- "आपके ग्रह को आपकी जरुरत है- जलवायु परिवर्तन का विरोध करने के लिये एक होना।"
9. 2008 थीम- "CO2, आदत को लात मारो- एक निम्न कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर।"
10. 2007 थीम- "बर्फ का पिघलना- एक गंभीर विषय है?"
11. 2006 थीम- "रेगिस्तान और मरुस्थलीकरण" और नारा- "शुष्क भूमि पर रेगिस्तान मत बनाओ।"
12. 2005 थीम- "हरित शहर" और नारा- "ग्रह के लिये योजना बनायें।"
13. 2004 थीम- "चाहते हैं! समुद्र और महासागर" और नारा- "मृत्यु या जीवित?"
14. 2003 थीम- "जल" और नारा- "2 बिलीयन लोग इसके लिये मर रहें हैं।"
15. 2002 थीम- "पृथ्वी को एक मौका दो।"
16. 2001 थीम- "जीवन की वर्ल्ड वाइड वेब।"
17. 2000 थीम- "पर्यावरण शताब्दी" और नारा- "काम करने का समय।"
18. 1999 थीम- "हमारी पृथ्वी- हमारा भविष्य" और नारा- "इसे बचायें।"
19. 1998 थीम- "पृथ्वी पर जीवन के लिये" और नारा- "अपने सागर को बचायें।"
20. 1997 थीम- "पृथ्वी पर जीवन के लिये।"
21. 1996 थीम- "हमारी पृथ्वी, हमारा आवास, हमारा घर।"
22. 1995 थीम- "हम लोग: वैश्विक पर्यावरण के लिये एक हो।"
23. 1994 थीम- "एक पृथ्वी एक परिवार।"
24. 1993 थीम- "गरीबी और पर्यावरण" और नारा- "दुष्चक्र को तोड़ो।"
25. 1992 थीम- "केवल एक पृथ्वी, ध्यान दें और बाँटें।"
26. 1991 थीम- "जलवायु परिवर्तन। वैश्विक सहयोग के लिये जरुरत।"
27. 1990 थीम- "बच्चे और पर्यावरण।"
28. 1989 थीम- "ग्लोबल वार्मिंग; ग्लोबल वार्मिंग।"
29. 1988 थीम- "जब लोग पर्यावरण को प्रथम स्थान पर रखेंगे, विकास अंत में आयेगा।"
30. 1987 थीम- "पर्यावरण और छत: एक छत से ज्यादा।"
31. 1986 थीम- "शांति के लिये एक पौधा।"
32. 1985 थीम- "युवा: जनसंख्या और पर्यावरण।"
33. 1984 थीम- "मरुस्थलीकरण।"
34. 1983 थीम- "खतरनाक गंदगी को निपटाना और प्रबंधन करना: एसिड की बारिश और ऊर्जा।"
35. 1982 थीम- "स्टॉकहोम (पर्यावरण चिंताओं का पुन:स्थापन) के 10 वर्ष बाद।"
36. 1981 थीम- "जमीन का पानी; मानव खाद्य श्रृंखला में जहरीला रसायन।"
37. 1980 थीम- "नये दशक के लिये एक नयी चुनौती: बिना विनाश के विकास।"
38. 1979 थीम- "हमारे बच्चों के लिये केवल एक भविष्य" और नारा- "बिना विनाश के विकास।"
39. 1978 थीम- "बिना विनाश के विकास।"
40. 1977 थीम- "ओजोन परत पर्यावरण चिंता; भूमि की हानि और मिट्टी का निम्निकरण।"
41. 1976 थीम- "जल: जीवन के लिये एक बड़ा स्रोत।"
42. 1975 थीम- "मानव समझौता।"
43. 1974 थीम- "74 के प्रदर्शन के दौरान केवल एक पृथ्वी।"
44. 1973 थीम- "केवल एक पृथ्वी।"

विश्व पर्यावरण दिवस स्लोगन

विश्व पर्यावरण दिवस पर कुछ प्रसिद्ध कथन (प्रसिद्ध व्यक्तियों द्वारा दिये गये) यहाँ दिया गये हैं:

  • “पर्यावरण सब कुछ है जो मैं नहीं हूँ।”- अल्बर्ट आइंस्टाईन
  • “इन पेड़ों के लिये भगवान ध्यान देता है, इन्हें सूखे, बीमारी, हिम्स्खलन और एक हजार तूफानों और बाढ़ से बचाता है। लेकिन वो इन्हें बेवकूफों से नहीं बचा सकता।”- जॉन मुइर
  • “भगवान का शुक्र है कि इंसान उड़ नहीं सकता, नहीं तो पृथ्वी के साथ ही आकाश को भी बरबाद कर देता।”- हेनरी डेविड थोरियु
  • “कभी शंका मत करो कि विचारशील का एक छोटा समूह, समर्पित नागरिक दुनिया को बदल सकता है; वास्तव में, ये एकमात्र चीज है जो हमेशा पास है।”- मार्गरेट मीड
  • “हमारे पास एक समाज नहीं होगा अगर हम पर्यावरण का नाश करेंगे।”- मार्गरेट मीड
  • “ये भयावह है कि पर्यावरण को बचाने के लिये हमें अपने सरकार से लड़ना पड़े।”- अंसेल एड्म्स
  • “मैं सोचता हूँ पर्यावरण को राष्ट्रीय सुरक्षा की श्रेणी में रखना चाहिये। अपने संसाधनों की रक्षा करना सीमा की सुरक्षा के समान ही जरुरी है। अन्यथा वहाँ क्या है रक्षा करने को?”- राबर्ट रेडफोर्ट
  • “अच्छे जल और हवा में एक प्रवाह लें; और प्रकृति के जीवंत युवा में आप इसे खुद से नया कर सकते हैं। शांति से जायें, अकेले; तुम्हारा कोई नुकसान नहीं होगा।”- जॉन मुइर
  • “पक्षी पर्यावरण की संकेतक होती है। अगर वो परेशानी में है, हम जानते हैं कि हमलोग जल्दी ही परेशानी में होंगे।”- रोजर टोरी पीटर्सन
  • “कीचड़ से साफ पानी में प्रदूषण करने के द्वारा आप कभी भी पीने को अच्छा पानी नहीं पायेंगे।”- एशीलस
  • “अगर हम पृथ्वी को सुंदरता और खुशी पैदा करने की अनुमति नहीं देते, अंत में ये भोजन पैदा नहीं करेगा, दोनों में से एक।”- जोसेफ वुड क्रच
  • “वो दावा करते हैं ये हमारी माँ का, धरती, उनके अपने प्रयोग के लिये, और उससे उनके पड़ोसियों को दूर रखो, अपने बिल्डिंगों और अपने कूड़े से बिगाड़ों उसे।”- सिटींग बुल
  • “मनुष्य और भूमि के बीच सौहार्द की एक स्थिति संरक्षण है।”- एलडो लियोपोल्ड
  • “आखिरकार, निरंतरता का अर्थ वैश्विक पर्यावरण का चलते रहना है- पृथ्वी निगमित- एक कार्पोरेशन की तरह: घिसावट के साथ, ऋणमुक्ति और रख-रखाव खाता। दूसरे शब्दों में, समस्त संपत्ति को रखना, बजाय इसके कि आपकी प्राकृतिक पूँजी को खोखला कर दें।”-मॉरिस स्ट्राँग
  • “भूमि के साथ सौहार्द एक दोस्त के सौहार्द जैसा है; आप उसके दायें हाथ को प्यार करें और बांये हाथ को काट नहीं सकते।”- एल्डो लियोपोल्ड
  • “आप मर सकते हैं लेकिन कार्बन नहीं; इसका जीवन आपके साथ नहीं मरेगा। ये वापस जमीन में चला जायेगा, और और वहाँ एक पौधा उसे दुबारा से उसी समय में ले सकता है, पौधे और जानवरों के जीवन के एक चक्र पर एक बार उसे दुबारा से भेजें।”- जैकब ब्रोनोस्की
  • “लोग अपने पर्यावरण को दोषी ठहराते हैं। इसमें केवल एक व्यक्ति को दोषी ठहराना है- और केवल एक- वो खुद।”-रॉबर्ट कॉलियर
  • “मैं प्रकृति, जानवरों में, पक्षियों में और पर्यावरण में ईशवर को प्राप्त कर सकता हूँ, पैट बकले
  • “हमें जरुर प्रकृति को लौटाना चाहिये और प्रकृति का ईश्वर।”- लूथर बरबैंक
  • “आगे बढ़ने का एक ही रास्ता है, अगर हम अवश्य पर्यावरण की गुणवत्ता को सुधार दें, सभी को शामिल होने के लिये है।”- रिचर्ड्स रोजरर्स
  • “हमारे पर्यावरण के लिये एक सच्ची वचनबद्धता के लिये मेरे साथ यात्रा। संतुलन में एक ग्रह को हमारे बच्चों के लिये छोड़ने की शुद्धता के लिये मेरे साथ यात्रा।”- पॉल सोंगास
  • “पर्यावरण निम्निकरण, अधिक जनसंखया, शरणार्थी, मादक पदार्थ, आतंकवाद, विश्व अपराध आंदोलन और प्रायोजित अपराध पूरे विश्व की समस्या है जो राष्ट्र की सीमा पर नहीं रुकता है।”- वारेन क्रिस्टोफर
  • “मैं सोचता हूँ कि सरकार को अपने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं में पर्यावरण को सबसे ऊपर की ओर खिसकाना चाहिये।”- ब्रॉयन मुलरोनी
  • “सार्वजनिक जीवन में अब मजबूती से अंत:स्थापित है पर्यावरण चिंता: शिक्षा में, मेडिसीन और कानून; पत्रकारिता में, साहित्य और कला में।”- बैरी कमोनर
  • “पृथ्वी दिवस 1970 अखंडनीय सबूत है कि अमेरिकन लोग पर्यावरण के डर को समझते हैं और इसको सुलझाने के लिये कार्यवाही करना चाहते हैं।”- बैरी कमोनर
  • “सरकार को स्वच्छ पर्यावरण के लिये एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिये ना कि शासनादेश कैसे ये लक्ष्य लागू करना चाहिये।”- डिक्सी ली रे
  • “क्यों ऐसा प्रतीत होता है कि केवल एक ही तरीका है पर्यावरण को सुधारने का और वो है सरकार का कड़ा नियमन?”- गेल नॉरटन
  • “एक बहुत महत्वपूर्ण पर्यावरण मुद्दा है जिसका कभी कभार ही जिक्र होता है, और जो कि हमारी संस्कृति में एक संरक्षण संस्कृति की कमी है।”- गेलार्ड नेल्सन
  • “पृथ्वी हर मनुष्य की जरुरत को पूरा करता है, लेकिन हर व्यक्ति के लालच को नहीं।”- महात्मा गाँधी
  • “विश्व के जंगलों से हम क्या रहें हैं केवल एक शीशे का प्रतिबिंब है जो हम अपने और एक-दूसरे के साथ कर रहें हैं।”- महात्मा गाँधी

पर्यावरण के प्रति जागरूकता और समाधान:-

पर्यावरण की अवहेलना के गंभीर दुष्परिणाम समूचे विश्व में परिलक्षित हो रहे हैं। अब सरकार जितने भी नियम-क़ानून लागू करें उसके साथ साथ जनता की जागरूकता से ही पर्यावरण की रक्षा संभव हो सकेगी। इसके लिए कुछ अत्यंत सामान्य बातों को जीवन में दृढ़ता-पूर्वक अपनाना आवश्यक है। जैसे

  1. प्रत्येक व्यक्ति प्रति वर्ष यादगार अवसरों (जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ) पर अपने घर, मंदिर या ऐसे स्थल पर फलदार अथवा औषधीय पौधा-रोपण करे, जहाँ उसकी देखभाल हो सके।
  2. उपहार में भी सबको पौधो दें।
  3. शिक्षा संस्थानों व कार्यालयों में विद्यार्थी, शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारीगण राष्ट्रीय पर्व तथा महत्त्वपूर्ण तिथियों पर पौधों रोपे।
  4. विद्यार्थी एक संस्था में जितने वर्ष अध्ययन करते हैं, उतने पौधो वहाँ लगायें और जीवित भी रखें।
  5. प्रत्येक गांव/शहर में हर मुहल्ले व कॉलोनी में पर्यावरण संरक्षण समिति बनायी जाये।
  6. निजी वाहनों का उपयोग कम से कम किया जाए।
  7. रेडियो-टेलीविजन की आवाज़ धीमी रखें। सदैव धीमे स्वर में बात करें। घर में पार्टी हो तब भी शोर न होने दें।
  8. जल व्यर्थ न बहायें। गाड़ी धोने या पौधों को पानी देने में इस्तेमाल किया पानी का प्रयोग करें।
  9. अनावश्यक बिजली की बत्ती जलती न छोडें। पॉलीथिन का उपयोग न करें। कचरा कूड़ेदार में ही डाले।
  10. अपना मकान बनवा रहे हों तो उसमें वर्षा के जल-संरक्षण और उद्यान के लिए जगह अवश्य रखें।

ऐसी अनेक छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर भी पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है। ये आपके कई अनावश्यक खर्चों में तो कमी लायेंगे ही, पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाने की आत्मसंतुष्टि भी देंगे। तो प्रयास कीजिये – सिर्फ सालाना आयोजन के उपलक्ष्य में ही नहीं बल्कि एक आदत के रूप में भी पर्यावरण चेतना को अपनाने का।

सबसे जरूरी बात यह है कि आज हर मनुष्य को अपने स्तर पर पर्यावरण को संतुलित रखने के प्रयास करना चाहिए. क्योकि पर्यावरण प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या से मुक्त होना किसी एक समूह के बस की बात नहीं है. इस समस्या पर काबू किसी नियम या कनून को लागू करके नहीं पाया जा सकता. अगर हर कोई इसके दुषपरिणाम के बारे मे सोचे और अपनी आगे वाली पीढ़ी के बारे मे सोचे तो ही इससे निजात संभव है।

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