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पत्रकार गौरी लंकेश हत्या केस मामला | Journalist Gauri Lankesh Murder Case in Hindi


क्या है भारत चीन डोकाला सीमा विवाद, जानिए…

gauri lankesh murder case in hindi

गौरी लंकेश की हत्या ने देश में हलचल मचा दी है। इस हत्या की भर्त्सना ज्यादातर पत्रकारों, उनकी संस्थाओं, कांग्रेस, बीजेपी समेत ज्यादातर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने की है। यह मुख्यधारा के मीडिया का सौम्य पक्ष है। सोशल मीडिया में गदर मचा पड़ा है। तलवारें-कटारें खुलकर चल रहीं हैं। कई किस्म के गुबार फूट रहे हैं। हत्या के फौरन बाद दो अंतर्विरोधी प्रतिक्रियाएं प्रकट हुईं हैं। …

पत्रकार गौरी लंकेश की बेंगलुरु के राजाराजेश्वरी नगर स्थित उनके आवास पर हत्या के बाद से ही देश भर में माहौल गर्म है। मंगलवार रात करीब 8 बजकर 30 मिनट पर गौरी लंकेश की उनके घर पर ही अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। गौरी लंकेश देश की पत्रकारिता में बड़ा नाम थीं, उनकी पहचान कट्टर दक्षिणपंथी ताकतों के खिलाफ लड़ाने वाली पत्रकार की थी। गौरी लंकेश साप्ताहिक मैग्जीन 'लंकेश पत्रिके' की संपादक थीं। वो अखबारों में कॉलम भी लिखती थीं। टीवी न्यूज चैनल डिबेट्स में भी वो एक्टिविस्ट के तौर पर शामिल होती थीं। अभी तक उनकी हत्या के मामले में हत्यारा पकड़ा नहीं जा सका है।

गौरी लंकेश हत्याकांड | Muder Case of Journalist Gauri Lankesh

गौरी लंकेश हत्या ने एक बार फिर से देश के लोकतंत्र पर और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ये एक बहुत विख्यात महिला पत्रकार थी. इनकी हत्या के बाद विभिन्न छोटे बड़े शहरों में हत्या का विरोध हो रहा है. इन्होंने हमेशा सांप्रदायिक शक्तियों के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की है. इस हत्या के बाद देश के कई सजग पत्रकार एक जुट हुए और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की।

गौरी लंकेश कौन हैं (Who is Gauri Lankesh)

ये देश की एक बहुत ही महत्वपूर्ण पत्रकार थीं. इन्हें इनकी निडरता और मुखरता के लिए बहुत अधिक जाना जाता था. ये एक कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ की संपादिका थीं, और इसके अलावा भी कई और तरह के प्रकाशन कार्यों में सदैव लगी रहती थीं. ये अपनी पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ को चलाने के लिए कहीं से प्रचार आदि नहीं लेती थी. ये पत्रिका इनके और इनके 50 साथियों के सहयोग से चलाई जाती थी. अपने संपादनों में इन्होने अक्सर सांप्रदायिक राजनीति की आलोचना की और राजनेताओं को कटघरे में खड़ा किया. इन्होने अक्सर अपने आलेखों में हिंदुत्व की राजनीति और दक्षिण पंथियों की काफ़ी आलोचना की।

नवम्बर 2016 में इनके एक लेख की वजह से इन पर मानहानि का मुकदमा भी चला था. यह मुक़दमा इनके द्वारा सन 2008 में लिखे गये एक आर्टिकल की वजह से चला, जिसके विरुद्ध भारतीय जनता पार्टी और उमेश धुसी ने इस लेख के विरुद्ध सवाल खड़े किये थे. इस मुकदमा में इन्हें 6 वर्ष का जेल और जुर्माना लगा था. हालाँकि सुनवाई के दिन ही इन्हें ज़मानत मिल गयी. गौरी लंकेश का कहना था कि वे देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर कोई खतरा नहीं चाहती और साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि देश भर में कैसे लोगों को उनकी विचारधारा की वजह से निशाना बनाया जाता है।

इन दिनों इनके कई ऐसे ट्वीट वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे देश की मौजूदा सरकार की काफ़ी आलोचना करती हुई नज़र आई हैं. इन्होने अपना करियर भी यहाँ पर रहते हुए ‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ के साथ किया था. इसके उपरान्त ये दिल्ली चली आयीं. इन्होने पत्रकारिता में अपने करियर के 16 वर्ष गुज़ारे।

गौरी लंकेश की हत्या कैसे की गयी (How Gauri Lankesh was Assassinated)

ये बैंगलोर की रहने वाली थीं. यहाँ पर हत्या वाले दिन इनके घर में घुस कर गोलियाँ इनके सर और सीने पर मारी गयी. इसके बाद उनकी मृत्यु मौके पर ही हो गयी. इनकी हत्या के बाद कुछ लोग जहाँ इसका विरोध कर रहे हैं, तो वहीँ दूसरी तरफ कुछ लोगों द्वारा इनके विरुद्ध इनकी हत्या के बाद भी गालियाँ लिखी जा रही है, जिसे संवेदनहीनता की हद माना जा रहा है।

गौरी लंकेश की हत्या का जिम्मेदार कौन (Who is The Murderer of GauriLankesh)

इनकी हत्या के पीछे का राज सही रूप से सामने नहीं आ पा रहा है. देश के विभिन्न हिस्सों में लोग इसका विरोध करते हुए अधिकतर दक्षिण पंथियों पर ही निशाना साध रहे हैं. ध्यान देने वाली बात ये है कि कर्णाटक में सिद्धारमैया की सरकार है. अतः सबसे पहले सवाल इनके प्रशासन पर उठ रहा है. इसके बाद एक बहुत बड़ी संख्या में लोग हिंदुत्व की राजनीति को इस हत्या के लिए कटघरे में ला रहे हैं. अभी तक यह भी तय नहीं हो पाया, कि इन पर गोली किसने चलाई।

इस समय एक प्रश्न ये भी आ रहा है कि गौरी का उनके भाई के साथ एक लम्बे समय तक झगड़ा रहा है. उनके और उनके भाई के बीच का मतभेद पुलिस थाणे तक भी जा चूका है. कुछ लोग इस मर्डर के पीछे इसे भी एक कारण बता रहे है. इनकी हत्या की शक का एक काँटा माओवादियों पर भी है।

क्या गौरी को इन्साफ मिल सकेगा (Will Gauri Get Justice)

यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है कि क्या इनके हत्यारों की पहचान हो पाएगी. इससे पहले भी गोविन्द पानसरे, प्रोफेसर कलबुर्गी, नरेन्द्र दाभोलकर की भी हत्याएं इसी तरह से हुईं हैं. किन्तु किसी भी कोर्ट अथवा सरकार की जांच द्वारा हत्यारो का नाम तक सामने नहीं आ पाया. इस वजह से लोगों में एक बार पुनः वही ग़ुस्सा दिखाई दे जो इससे पहले हुईं हत्याओं पर उन्होंने ज़ाहिर किया था. सरकार पर इन सभी हत्याओं की जांच का भार है।

राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह आरएसएस और भाजपा की विचारधारा है, सच्चाई को दबाने की, लेकिन यह नहीं किया जा सकता है, आप कितनी भी कोशिश कर लीजिए, सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता है। आपको बता दें कि गौरी लंकेश की हत्या के बाद उनके भाई इंद्रजीत ने हत्या की सीबीआई से जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हमें पुलिस पर भरोसा नहीं है।

हम डरकर नहीं हटेंगे पीछे पत्रकारों ने बुलंद की आवाज (Journalists Protest Nationwide Against- Gauri Murder)

बेंगलुरु से भोपाल तक और पटना से तिरुवनंतपुरम तक, गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में देश के अलग-अलग शहरों में पत्रकार सड़कों पर उतर आए।

गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में अलग-अलग शहरों में देशभर के पत्रकार उमड़ पड़े. पत्रकारों का साथ देने के लिए सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के नेता भी आए. सबने माना ये लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है. बेंगलुरु से भोपाल तक और पटना से तिरुवनंतपुरम तक, गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में अलग-अलग शहरों में पत्रकार सड़कों पर उतर आए. दिल्ली के प्रेस क्लब में दोपहर से पत्रकार, अलग-अलग संगठनों के लोग और नेता जुटने लगे।

दिल्ली में प्रेस क्लब के खचाखच भरे परिसर में एनडीटीवी के रवीश कुमार ने इस बात पर ध्यान खींचा कि गौरी लंकेश की मौत पर बहुत अभद्र भाषा में छींटाकशी कर रहे लोगों को किस तरह देश की सत्ता का मौन समर्थन हासिल है. जाने-माने पत्रकार और 'द वायर' के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा कि विरोध चाहे जितना हो, हम डर के पीछे न हटें. हिंद स्वराज के संस्थापक योगेंद्र यादव ने कहा, ये व्यक्ति की नहीं, विचार की हत्या है।

साहसी खोजी पत्रकार थी गौरी लंकेश

गौरी अपने पिता के स्‍थानीय अखबार अखबार लंकेश पत्रिका के ऑपरेशन का जिम्‍मा संभालती थीं. अपने पिता की तरह निर्भीक भी थीं, गौरी लंकेश बेहद आत्‍मनिर्भर महिला थीं. डूप्‍लेक्‍स अपार्टमेंट और शहर में अभिभावकों के पास एक विला होने के बावजूद वह बेंगलुरू के बाहरी मैसूर रोड इलाके में अकेली रहती थीं।

इन की भी की गयी हत्या

पत्रकारों की संरक्षा के लिए बनी वैश्विक संस्था कमेटी टु प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स का अनुमान है कि सन 1999 से 2017 के बीच भारत में जिन 67 पत्रकारों की हत्याओं का विवरण एकत्र किया गया है। उनमें से 40 की हत्या साफ-साफ पत्रकारिता से जुड़े लक्ष्य से की गई थी। पर यहां सज़ा किसी को नहीं होती। सीपीजे इम्प्यूनिटी इंडेक्स जारी करती है। यानी हत्या करने वालों का सज़ा पाने से बचा रहना। इस इंडेक्स में जिन 13 देशों को रखा गया है उनमें भारत भी है।

पत्रकारों की आजादी की बुनियाद उनकी निष्पक्षता है. इसी से वो बिना किसी की तरफदारी किए हुए खुलकर अपनी बात कह पाते हैं. इसी से उनके काम को सम्मान और भरोसा हासिल होता है. गौरी लंकेश की हत्या के बाद अगर हम इन बुनियादी उसूलों पर फिर से अमल कर सकें, तो सबसे अच्छी बात होगी।

लेकिन देश भर में पत्रकारों का जुटा ये हुजूम बताता है कि हमारे यहां लोकतंत्र की जड़ें भी गहरी हैं और इसे बचाए रखने के लिए लड़ने का जज्बा भी पूरा है। I Love My India जय हिंद।

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“ मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है ”

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