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योग के महत्वपूर्ण आसन और उनके लाभ | Yogasana Types & Benifits in Hindi


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योग एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति है। जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है। योग के माध्यम से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। तीनों के स्वस्थ रहने से आप स्‍वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं।.. …

योगासनो के प्रकार और लाभ | List of Best Yoga Asanas

योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को भी दूर किया जा सकता है। योग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है। योगा शरीर को शक्तिशाली एवं लचीला बनाए रखता है साथ ही तनाव से भी छुटकारा दिलाता है जो रोजमर्रा की जि़न्दगी के लिए आवश्यक है। योग आसन और मुद्राएं तन और मन दोनों को क्रियाशील बनाए रखती हैं।

योग क्या है? (What is Yoga)

योग का अर्थ है जोड़ना. जीवात्मा का परमात्मा से मिल जाना, पूरी तरह से एक हो जाना ही योग है। योगाचार्य महर्षि पतंजली ने सम्पूर्ण योग के रहस्य को अपने योगदर्शन में सूत्रों के रूप में प्रस्तुत किया है.
उनके अनुसार, “चित्त को एक जगह स्थापित करना योग है।

योगासन क्या है? (What is yoga asanas?)

हमारा मन एक लोलक की तरह है; जो की भूत से भविष्य, अफसोस और गुस्से से चिंता, एवम् डर और ख़ुशी से दुख के बीच में झूलते रहता हैI योग आसन हमें जीवन में समता बनाए रखने में सक्षमबनाते है। योग आसन मात्र कसरत या अभ्यास नहीं है!

जैसे पतंजलि के योग सूत्र में वर्णित है - "स्थिरम सुख़म आसनम" का अर्थ है की योगासन प्रयास और विश्राम का संतुलन है I हम आसन में आने के लिए प्रयास करते हैं और फिर हम वहीं विश्रामकरते हैं। योगासन हमारे जीवन के हर पहलू में संतुलन लाती है। यह हमें प्रयास करने के लिए सिखाता है और फिर समर्पण, परिणाम से मुक्त होने का ज्ञान देता है। योगासन हमारे शारीरिकलचीलेपन को बढ़ाता है और हमारे विचारों को विकसित करता है।

योगासन साँसों के लय एवम् सजगता के साथ किया जाना चाहिए। जब हम अपने हाथों को योग के लिए उठाते हैं, तो पहले हम अपने हाथ के प्रति सजग होते हैं और फिर हम इसे धीरे-धीरे उठाते हैं, साँस के साथ लय में करते हैं। योगासन के एक मुद्रा से दुसरे मुद्रा में जाना एक नृत्य की तरह सुंदर है। प्रत्येक आसन में हम जो कुछ भी सहजता से कर सकते है, उससे थोड़ा ज्यादा करें और फिरउसी में आराम से विश्राम करे यही योगाभ्यास की कुंजी है । शरीर को अपनी स्वीकार्य सीमा से परे ले जाने पर ये आसन हमारे मन का विकास करतें हैं।

अष्टांग योग क्या है?

हमारे ऋषि मुनियों ने योग के द्वारा शरीर मन और प्राण की शुद्धि तथा परमात्मा की प्राप्ति के लिए आठ प्रकार के साधन बताएँ हैं, जिसे अष्टांग योग कहते हैं.

यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रात्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि

आसान से क्या हैं?

आसान से तात्पर्य शरीर की वह स्थिति है जिसमें आप अपने शरीर और मन को शांत स्थिर और सुख से रख सकें.

स्थिरसुखमासनम्: सुखपूर्वक बिना कष्ट के एक ही स्थिति में अधिक से अधिक समय तक बैठने की क्षमता को आसन कहते हैं।

योग शास्त्रों के परम्परानुसार चौरासी लाख आसन हैं और ये सभी जीव जंतुओं के नाम पर आधारित हैं। इन आसनों के बारे में कोई नहीं जानता इसलिए चौरासी आसनों को ही प्रमुख माना गया है. और वर्तमान में बत्तीस आसन ही प्रसिद्ध हैं।

आसनों को दो समूहों में बांटा गया है :-

  1. गतिशील आसान : वे आसन जिनमे शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है.
  2. स्थिर आसन : वे आसन जिनमे अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है.

कुछ महत्वपूर्ण योगासन (Some Important Yogasana)

हिंदी नाम संस्कृत नाम
कोनासन (Konasana) कोनासन
कोनासन २ (Konasana 2) कोनासन २
कटिचक्रासन (Katichakrasana) कटिचक्रासन
हस्तपादासन (Hastapadasana) हस्तपादासन
अर्ध चक्रासन (Ardha Chakrasana) अर्ध चक्रासन
त्रिकोणासन (Trikonasana) त्रिकोणासन
वीरभद्रासन (Veerabhadrasana) वीरभद्रासना / वीरभद्रासन
पसारिता पादोत्तनासन (Parsarita Padotanasana पसारिता पादोत्तनासन
वृक्षासन (Vrikshasana) वृक्षासन
पश्चिम नमस्कार (Paschim Namaskarasana) पश्चिम नमस्कार
गरुड़ासन (Garudasana) गरुड़ासन
कुर्सी आसन (Chair Pose - Utkatasana) उत्कटासन
जानु शीर्षासन (Janu Shirasasana) जानु शीर्षासन
पश्चिमोत्तासन (Paschimottanasana) पश्चिमोत्तासन
पूर्वत्तनासन (Poorvottanasana) पूर्वत्तनासन
वसिष्ठासन (Vasisthasana) वसिष्ठासन
अधो मुख श्वानासन (Adho Mukh swanasana) अधो मुख श्वानासन
मकर अधो मुख श्वानासन (Makara Adho Mukha Svanasana) मकर अधो मुख श्वानासन
अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Ardha Matsyendrasana) अर्ध मत्स्येन्द्रासन
तितली आसन (Butterfly - Badhakonasana) बद्धकोणासन
कमल आसन (Lotus pose - Padmasana) पद्मासना
एक पाद राज कपोटासन (Ek Pada Raja Kapotasana) एक पाद राज कपोटासन
मार्जरी आसान (Marjariasana) मार्जरी आसान
उष्ट्रासन (Ustrasana) उष्ट्रासन
शिशु आसन (Shishuasana) शिशु आसन
चक्की मंथन आसन (Chakki Chalanasana) चक्की चलानासन
धनुरासन (Dhanurasana) धनुरासन
भुजंगासन (Bhujangasana) भुजंगासन
सलम्बा भुजंगासन (Salamba Bhujangasana) सलम्बा भुजंगासन
विपरीत शलभासन (Viparita Shalbhasana) विपरीत शलभासन
शलभासन (Shalabasana) शलभासन
नौकासन (Naukasana) नौकासन
सेतु बंधासन (Setu Bandhasana) सेतु बंधासन
मत्स्यासन (Matsyasana) मत्स्यासन
पवनमुक्तासन (Pavanamuktasana) पवनमुक्तासन
सर्वांगासन (Sarvangasana) सर्वांगासन
हलासन (Halasana) हलासन
नटराजासन (Natrajasana) नटराजासन
विष्णुआसन (Vishnuasana) विष्णुआसन
शवासन (Shavasana) शवासन

शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए आसन (Major Types of Yogasana in Hindi)

स्वस्तिकासन / Swastikasana

स्थिति :- स्वच्छ कम्बल या कपडे पर पैर फैलाकर बैठें।

विधि :- बाएं पैर को घुटने से मोड़कर दाहिने जंघा और पिंडली (calf, घुटने के नीचे का हिस्सा) और के बीच इस प्रकार स्थापित करें की बाएं पैर का तल छिप जाये उसके बाद दाहिने पैर के पंजे और तल को बाएं पैर के नीचे से जांघ और पिंडली के मध्य स्थापित करने से स्वस्तिकासन बन जाता है। ध्यान मुद्रा में बैठें तथा रीढ़ (spine) सीधी कर श्वास खींचकर यथाशक्ति रोकें।इसी प्रक्रिया को पैर बदलकर भी करें।

लाभ :-

  • पैरों का दर्द, पसीना आना दूर होता है।
  • पैरों का गर्म या ठंडापन दूर होता है.. ध्यान हेतु बढ़िया आसन है।

गोमुखासन / Gomukhasana

विधि :-

  • दोनों पैर सामने फैलाकर बैठें। बाएं पैर को मोड़कर एड़ी को दाएं नितम्ब (buttocks) के पास रखें।
  • दायें पैर को मोड़कर बाएं पैर के ऊपर इस प्रकार रखें की दोनों घुटने एक दूसरे के ऊपर हो जाएँ।
  • दायें हाथ को ऊपर उठाकर पीठ की ओर मुडिए तथा बाएं हाथ को पीठ के पीछे नीचे से लाकर दायें हाथ को पकडिये .. गर्दन और कमर सीधी रहे।
  • एक ओ़र से लगभग एक मिनट तक करने के पश्चात दूसरी ओ़र से इसी प्रकार करें।

Tip :- जिस ओ़र का पैर ऊपर रखा जाए उसी ओ़र का (दाए/बाएं) हाथ ऊपर रखें.

लाभ :-

  • अंडकोष वृद्धि एवं आंत्र वृद्धि में विशेष लाभप्रद है।
  • धातुरोग, बहुमूत्र एवं स्त्री रोगों में लाभकारी है।
  • यकृत, गुर्दे एवं वक्ष स्थल को बल देता है। संधिवात, गाठिया को दूर करता है।


कुछ और योगासन इस प्रकार है :-

अर्ध चन्द्रासन : जैसा कि नाम से पता चल रहा है, इस आसन में शरीर को अर्ध चन्द्र के आकार में घुमाया जाता है। इसको भी खड़े रहकर किया जाता है। यह आसन पूरे शरीर के लिए लाभप्रद है।

भुजंग आसन : रोज अभ्यास से कमर की परेशानियां दूर होती हैं। ये आसन पीठ और मेरूदंड के लिए लाभकारी होता है।

नटराज आसन : फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। इय योग से कंधे मजबूत होते हैं साथ ही बाहें और पैर भी मजबूत होते हैं। जिनको लगातार बैठकर काम करना होता है उनके लिए नटराज आसन बहुत ही फायदेमंद है।

सुखासन : बैठकर किया जाने वाला योग है। ये योग मन को शांति प्रदान करने वाला योग है। इस योग के दौरान नाक से सांस लेना और छोड़ना होता है।

ताड़ासन : के अभ्यास से शरीर सुडौल रहता है और इससे शरीर में संतुलन और दृढ़ता आती है।

त्रिकोणासन : अभ्यास करने से शरीर का तनाव दूर होता है और शरीर में लचीलापन आता है।

वज्रासन : बैठकर किया जाना जाने वाला योग है। शरीर को सुडौल बनाने के लिए किया जाता है। अगर आपको पीठ और कमर दर्द की समस्या हो तो ये आसन काफी लाभदायक होगा।

उत्कट आसन : शरीर के नीचले हिस्से कमर, घुटने एवं पैरो में मजबूती आती है। योग की इस मुद्रा से रीढ की हड्डियों को भी लाभ पहुंचता है।

प्राणायाम क्या है? (What is Pranayam)

प्राण का अर्थ, ऊर्जा अथवा जीवनी शक्ति है तथा आयाम का तात्पर्य ऊर्जा को नियंत्रित करनाहै। इस नाडीशोधन प्राणायाम के अर्थ में प्राणायाम का तात्पर्य एक ऐसी क्रिया से है जिसके द्वारा प्राण का प्रसार विस्तार किया जाता है तथा उसे नियंत्रण में भी रखा जाता है.

प्रमुख प्राणायाम इस प्रकार है :-

अनुलोम-विलोम प्राणायाम / Anulom Vilom Pranayam

विधि :-

  • ध्यान के आसान में बैठें।
  • बायीं नासिका से श्वास धीरे-धीरे भीतर खींचे।
  • श्वास यथाशक्ति रोकने (कुम्भक) के पश्चात दायें स्वर से श्वास छोड़ दें।
  • पुनः दायीं नाशिका से श्वास खीचें।
  • यथाशक्ति श्वास रूकने (कुम्भक) के बाद स्वर से श्वास धीरे-धीरे निकाल दें।
  • जिस स्वर से श्वास छोड़ें उसी स्वर से पुनः श्वास लें और यथाशक्ति भीतर रोककर रखें… क्रिया सावधानी पूर्वक करें, जल्दबाजी ने करें।

लाभ :-

  • शरीर की सम्पूर्ण नस नाडियाँ शुद्ध होती हैं।
  • शरीर तेजस्वी एवं फुर्तीला बनता है।
  • भूख बढती है।
  • रक्त शुद्ध होता है।

सावधानी :-

  • नाक पर उँगलियों को रखते समय उसे इतना न दबाएँ की नाक कि स्थिति टेढ़ी हो जाए।
  • श्वास की गति सहज ही रहे।
  • कुम्भक को अधिक समय तक न करें।

कपालभाति प्राणायाम / Kapalbhati Pranayam

विधि :-

  • कपालभाति प्राणायाम का शाब्दिक अर्थ है, मष्तिष्क की आभा को बढाने वाली क्रिया।
  • इस प्राणायाम की स्थिति ठीक भस्त्रिका के ही सामान होती है परन्तु इस प्राणायाम में रेचक अर्थात श्वास की शक्ति पूर्वक बाहर छोड़ने में जोड़ दिया जाता है।
  • श्वास लेने में जोर ने देकर छोड़ने में ध्यान केंद्रित किया जाता है।
  • कपालभाति प्राणायाम में पेट के पिचकाने और फुलाने की क्रिया पर जोर दिया जाता है।
  • इस प्राणायाम को यथाशक्ति अधिक से अधिक करें।

लाभ :-

  • हृदय, फेफड़े एवं मष्तिष्क के रोग दूर होते हैं।
  • कफ, दमा, श्वास रोगों में लाभदायक है।
  • मोटापा, मधुमेह, कब्ज एवं अम्ल पित्त के रोग दूर होते हैं।
  • मस्तिष्क एवं मुख मंडल का ओज बढ़ता है।

भ्रामरी प्राणायाम / Bhramri Panayam

स्थिति :- किसी ध्यान के आसान में बैठें.

विधि :-

  • आसन में बैठकर रीढ़ को सीधा कर हाथों को घुटनों पर रखें . तर्जनी को कान के अंदर डालें।
  • दोनों नाक के नथुनों से श्वास को धीरे-धीरे ओम शब्द का उच्चारण करने के पश्चात मधुर आवाज में कंठ से भौंरे के समान गुंजन करें।
  • नाक से श्वास को धीरे-धीरे बाहर छोड़ दे।
  • पूरा श्वास निकाल देने के पश्चात भ्रमर की मधुर आवाज अपने आप बंद होगी।
  • इस प्राणायाम को तीन से पांच बार करें।

लाभ :-

  • वाणी तथा स्वर में मधुरता आती है।
  • ह्रदय रोग के लिए फायदेमंद है।
  • मन की चंचलता दूर होती है एवं मन एकाग्र होता है।
  • पेट के विकारों का शमन करती है।
  • उच्च रक्त चाप पर नियंत्रण करता है।

योग किसी भी धर्म और संप्रदाय से नहीं जुड़ा है। योग प्रेम, अहिंसा, करुणा और सबको साथ लेकर चलने की बात करता है।

योग से होने वाले शारीरिक और मानसिक फायदों के बारे में हम सब जानते हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित हो जाने से योग कई और आयामों में भी कारगर साबित हो सकता है.

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