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अपना घर योजना : किस्त दें, किराये का घर हो सकता है अपना! | Rent to Own Homes scheme


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मकान किराये में देने और लेने वालों को नई सौगात देने के लिए सरकार ने योजना तैयार कर ली है. इस योजना से मकान का किराया कम होने से किरायेदार को फायदा होगा वहीँ रेट फिक्स होने से मकान किराए पर देने वालों को भी फायदा मिलेगा। …

सरकार की नई रेंट टू ओन होम के तहत अब सबका अपने घर का सपना पूरा होने में मदद मिलेगी. भारत की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा गावों में निवास करता है लोग अपने रोजगार के लिए शहरों की तरफ रुख कर रहे है. शहर में रोजगार करके वो पैसों की पूर्ति तो कर लेते है, लेकिन शहरों में अपना खुद का मकान हो ऐसा चाहते हुए भी ज्यादातर लोग नहीं ये कर पाते है. ये स्कीम उनकी वित्तीय क्षमता के आधार पर घर के सपने को साकार करने में सहायक होगी. अब ऐसे सपनों को पंख देने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने एक नई स्कीम या नीति बनाई है, जिसके तहत सरकार गरीबी रेखा बीपीएल के नीचे रहने वालों के लिए किराया आवास नीति को लॉन्च किया है. इस सरकारी योजना के तहत आप बाजार मूल्य से लगभग 20% कम तक की लागत पर अपना नया घर किराये पर ले सकते है, जिसमे सम्पति या घर खरीदने या इसके एक हिस्से को खरीदने का विकल्प आपके पास रहता है. इसको इंटरमिडियट रेंटल भी कहा जाता है.

किराये पर अपना घर लेने की सरकार की नई योजना के काम करने का तरीका (Rent to Own Homes schemes work

इस योजना के तहत सरकार के द्वारा शहरी निकायों की मदद से पंजीकरण कराना होगा, फिर आपके आवेदन को देखा जायेगा जिसमे यह देखा जायेगा की आप किराये का भुगतान कर सकते है या नहीं. शुरुआत में आपको घर के किराये के साथ एक महीने का अतिरिक्त किराया होल्डिंग शुल्क के रूप में देना होगा और फिर आपको कुछ राशि का भुगतान डाउन पेमेंट के रूप में करना होगा. तीन साल तक आपको हर महीने उतनी ही राशि का भुगतान करते रहना होगा. जो भी सम्पति का मूल्य किरायेदार और मालिक के बीच में तय होता है उनका विक्रेता मूल्य पर हस्ताक्षर होता है.

जो किराये का भुगतान किया जाता है उसी राशि में से 25% तक की राशि खरीद के रूप में कटती जाती है, जिस वजह से खरीददार पर अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ता है अनुबंध के मुताबिक शर्तों के आधार पर खरीददार सम्पति को बनाये रखने के लिए उसकी मरम्मत, सम्पति कर और बीमा का भुगतान करने के लिए जिमेदार होगा. अगर विक्रेता चाहे तो वो भी बीमा कर के विकल्प को चुन सकता है, क्योकि वह अपनी सम्पति के किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए ऐसा कर सकता है.

अगर संभावित खरीददार जो अवधि उसे मिली है उसके अंत तक यह निर्णय नहीं कर पाता कि उसे सम्पति खरीदनी है या नहीं, तो उस स्थिति में घर को खरीदने का विकल्प समाप्त हो जाता है. लेकिन उसके द्वारा किये गए भुगतान जप्त हो जाते है. अगर वह घर लेने के लिए तैयार हो जाता है तो अनुबंध के आधार पर विक्रेता को पूरा भुगतान करना होता है. इस तरह की खरीद बिक्री के लिए किरायेदार और विक्रेता दोनों को ही अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले स्थानीय वकील से सलाह जरुर ले लेनी चाहिए, वही आपको सही और सटीक विचार दे सकता है.

किराये पर अपना घर लेने की सरकार की नई योजना से खरीदारों के लिए जोखिम (Rent to Own Homes risks for buyer)

किराये द्वारा अपने घर की स्कीम या रेंट टू ओन होम के तहत घर को खरीदना जोखिम भरा भी हो सकता है, जैसे कि आपके द्वारा चुकता किये हुए धन को विक्रेता आसानी से जब्त कर सकता है, साथ ही यह बहुत धीमी प्रगति वाली योजना हो सकती है. सबसे बड़ी जोखिम सम्पति पर आपका कम नियंत्रण है, जिस वजह से आपका मकान मालिक बंधक भुगतान करना बंद कर सकता है. हालाँकि क़ानूनी लडाई हमेशा आपके पास विकल्प के रूप में रहेगी, लेकिन यह काफी दर्द भरा हो सकता है. ऐसा भी संभव हो सकता है कि घर की कीमतें गिर जाये लेकिन आपके पास कीमतों को कम करने का रास्ता बंद हो सकता है, क्योकि विक्रेता कभी भी कीमतों को कम करने के लिए तैयार नहीं होगा.

इस स्कीम के तहत अगर आप समय पर भुगतान नहीं करते है तो आप घर खरीदने के अधिकार को खो सकते है. इस तरह की स्कीम के तहत घर की समस्या भी आ सकती है.

किराये पर अपना घर लेने की सरकार की नई योजना से विक्रेताओ के लिए जोखिम (Rent to Own Homes risks for seller)

जितना ये स्कीम खरीददारों के लिए जोखिम भरा है उतना ही यह विक्रेताओं के लिए भी जोखिम से भरा है जैसे की इस स्कीम के तहत कोई निश्चितता नहीं है कि किरायेदार आपकी सम्पति को खरीदेगा ही, जिस वजह से फिर से नए किरायेदार के साथ शुरुआत करनी होगी. इस स्कीम के तहत आपको सम्पत्ति की बिक्री की इकट्ठी और बड़ी राशि नहीं मिलती है. आम तौर पर बिक्री मूल्य को लॉक किया जाता है जब आप अनुबंध पर हस्ताक्षर करते है. इस बीच हो सकता है कि सम्पति के कीमतों में बढ़ोतरी हो तो आप अधिक मांग नहीं कर सकते या घर की कीमत कम हो जाये तो आपका किरायेदार हो सकता है घर न ख़रीदे. साथ ही वो नई नई खामियों को खोज कर भी घर न खरीदने का निर्णय कर सकता है.

किराये पर अपना घर लेने की सरकार की नई योजना का उदेश्य (Rent to Own Homes objectives)

सरकार की इस योजना का उदेश्य यह है कि जो प्रवासी शहरों में अपना घर चाहते है, सरकार इस किराया नीति से सरकारी निकायों के द्वारा वहाँ एक घर को किराये पर लेने की इजाज़त देगी, जिसको बाद में बहुत आसान किस्तों में किरायेदार भुगतान कर घर खरीद सकता है. किरायेदार को किराये के घर को खरीदने का विकल्प 3 साल तक के लिए रहता है. इस तरह कि सरकार द्वारा एक और योजना प्रधानमंत्री आवास योजना निकाली गई है.

किराये पर अपना घर लेने की सरकार की नई योजना के लिए हेल्पलाइन नम्बर (Rent to Own Homes helpline)

स्कीम होम के तहत घर खरीदने के लिए किराया वाले घर को ढूढ़ना बहुत मुश्किल काम है, इसलिए इस तरह के सम्पति खरीद के लिए helptobuy.org.uk की वेवसाइट पर सूचीबद्ध एजेंटों से पंजीकरण करा कर घर की खोज शुरू कर सकते है.

किराये पर अपना घर लेने की सरकार की नई योजना के फ़ायदे (Rent to Own Homes benefits)

इस स्कीम का फ़ायदा यह है कि जो 75000 से 95000 तक कमाई करने वाले बीपीएल धारक है जिनके पास जमा पूंजी का आभाव है, उन्हें अपना घर खरीदने में मदद मिलेगी, उन्हें इस योजना के तहत ऋण भी लेने में सुविधा होगी. साझा इक्विटी के तहत यदि घर खरीदार 5 फीसदी की राशि बचा सकते है तो सरकार घर के 25 फीसदी तक की राशी कवर करेगी, जिससे उन्हें लाभ मिलेगा.

किराये पर अपना घर लेने की सरकार की नई योजना से हानि (Rent to Own Homes disadvantage)

ये नीति अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है जिस वजह से इस नीति के तहत घर खरीदना थोड़ी असमंजसता की स्थिति पैदा कर सकता है.

घर की कीमत के हिसाब से तय होगी किस्त

स्कीम के तहत पहले कुछ सालों के लिए सरकार घर को लीज पर देगी. घर की कीमत के हिसाब से हर महीने की किस्त तय होगी. घर की इएमआइ के बराबर पैसा प्रत्येक माह बैंक में जमा करना होगा. इसमें से कुछ पैसे किराये के रूप में जमा होंगे. कुछ सरकार के पास अलग खाते में जमा होंगे. जब यह जमा की गयी कुल राशि (किराया और सरकार के पास जमा) घर की कीमत की दस फीसदी हो जायेगी, तब घर की रजिस्ट्री संबंधित किरायेदार के नाम कर दी जायेगी. यदि लीज पर लेनेवाला व्यक्ति रकम जमा नहीं कर पाता है, तो सरकार इस मकान को फिर से बेच देगी. किराये के साथ अलग खाते में जमा की जाने वाली राशि किरायेदार को बिना ब्याज के वापस लौटा दी जायेगी.

2022 तक होगा सबका अपना घर

सरकार का लक्ष्य है कि 2022 तक सबके पास अपना घर हो. सरकार कह रही है कि हम अपने वादे ‘2022 तक सबका अपना घर’ को पुरा करने जा रहे हैं. मंत्री आगे कहते हैं कि 2019 तक सरकार 15 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में इस लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करेगी. बाकि राज्यों में 2022 तक इस लक्ष्य को हासिल कर लिया जायेगा.

फ्रेंड्स, उम्मीद करता हूँ यहाँ दी गयी जानकारी से आपको ज़रूर कुछ लाभ मिलेगा।

Jai Hind!

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