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विश्व जल दिवस विशेष: आओ रोकें जल की बर्बादी - जल ही जीवन है! | World water day special- Let's stop wasting water!!


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पूरे विश्व के लोगों द्वारा हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा के द्वारा इस दिन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मनाने का निर्णय किया गया। लोगों के बीच जल का महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रुप में मनाने के लिये इस अभियान की घोषणा की गयी थी।

पानी के बारे में एक नहीं, कई चौंकाने वाले तथ्य हैं। विश्व में और विशेष रुप से भारत में पानी किस प्रकार नष्ट होता है इस विषय में जो तथ्य सामने आए हैं उस पर जागरूकता से ध्यान देकर हम पानी के अपव्यय को रोक सकते हैं। अनेक तथ्य ऐसे हैं जो हमें आने वाले ख़तरे से तो सावधान करते ही हैं, दूसरों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और पानी के महत्व व इसके अनजाने स्रोतों की जानकारी भी देते हैं।

पानी हम सभी प्राणियों के जीवन के लिए अहम संसाधन हैं। हम मनुष्य इतने लापरवाह हैं की हमे अपने अलावा किसी की कोई फ़िक्र नहीं हैं।

जितना हम ने नयी नयी खोजे की हैं, नए नए आविष्कार किये हैं उससे कई ज्यादा हमने अपने सभी संसाधनों का बुरी तरीके से दुरुपयोग किया और इससे केवल हमारी ही हानि नहीं बल्कि जितने भी जीव जंतु इस पृथ्वी पर रहते हैं सभी के अस्तित्व को हमने अपने लोभ द्वारा विलुप्तिकरण की ओर पहुंचा रहे हैं।

जैसे की जंगलो को काटना, वृक्षों को काटना, वायु को दूषित करना, और सबसे अधिक पानी को प्रदूषित करना. अपने घर को साफ़ रखने के लिए हम घर का कचरा उठा कर नदियों और नहरो में फेंक देते हैं लेकिन आखिर में वो जल जहर बन कर हमारे पेट में जा कर हमे कई बीमारियों का शिकार बनाता हैं जिसका एक ही कारण हैं और उस कारण के पीछे केवल हम ही जिम्मेदार हैं।

आज के इस शुभ दिन पर हम सभी को प्रण लेना चाहिए की किसी भी तरह से पानी को प्रदूषित होने से बचाएँगे. अपने पर्यावरण का ख्याल रखेंगे।

विश्व जल दिवस कैसे मनाया जाता है

पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जल के महत्व की ओर लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये पूरे विश्व भर में विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इसे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और क्रियाकलापों के आयोजनों के द्वारा मनाया जाता है जैसे दृश्य कला, जल के मंचीय और संगीतात्मक उत्सव, स्थानीय तालाब, झील, नदी और जलाशय की सैर, जल प्रबंधन और सुरक्षा के ऊपर स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचर्चा, टीवी और रेडियो चैनल या इंटरनेट के माध्यम से संदेश फैलाना, स्वच्छ जल और संरक्षण उपाय के महत्व पर आधारित शिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिता तथा ढ़ेर सारी गतिविधियाँ। नीले रंग की जल की बूँद की आकृति विश्व जल दिवस उत्सव का मुख्य चिन्ह है।

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जल संरक्षण के संकल्प का दिन

22 मार्च यानी कि विश्व जल दिवस, पानी बचाने के संकल्प का दिन है. यह दिन जल के महत्व को जानने का और पानी के संरक्षण के विषय में समय रहते सचेत होने का दिन है। आँकड़े बताते हैं कि विश्व के 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। प्रकृति इंसान को जीवनदायी संपदा जल एक चक्र के रूप में प्रदान करती है, इंसान भी इस चक्र का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। चक्र को गतिमान रखना प्रत्येक व्यक्ति की ज़िम्मेदारी है. इस चक्र के थमने का अर्थ है, जीवन का थम जाना. प्रकृति के ख़ज़ाने से जितना पानी हम लेते हैं, उसे वापस भी हमें ही लौटाना है। हम स्वयं पानी का निर्माण नहीं कर सकते. अतः प्राकृतिक संसाधनों को दूषित नहीं होने देना चाहिए और पानी को व्यर्थ होने से भी बचाना चाहिए। 22 मार्च का दिन यह प्रण लेने का दिन है कि हर व्यक्ति को पानी बचाना है।

भारत में जल की स्थित

यदि हम भारत की बात करें तो देखेंगे कि एक तरफ दिल्ली, मुंबई जैसे महानगर हैं, जहाँ पानी की किल्लत तो है, किंतु फिर भी यहाँ पानी की समस्या विकराल रूप में नहीं है। लेकिन देश के कुछ ऐसे राज्य भी हैं, जहाँ आज भी कितने ही लोग साफ़ पानी के अभाव में या फिर रोग जनित गन्दे पानी से दम तोड़ रहे हैं। राजस्थान, जैसलमेर और अन्य रेगिस्तानी इलाकों में पानी आदमी की जान से भी ज़्यादा कीमती है। पीने का पानी इन इलाकों में बड़ी कठिनाई से मिलता है। कई-कई किलोमीटर चल कर इन प्रदेशों की महिलाएँ पीने का पानी लाती हैं। इनकी ज़िंदगी का एक अहम समय पानी की जद्दोजहद में ही बीत जाता है।

भारत में सालाना लाखों लोगों की मौत दूषित पानी और खराब साफ-सफाई की वजह से होती है। दूषित जल के सेवन की चपेट में आने वाले लोगों के चलते हर साल देश की अर्थव्यवस्था को अरबों रूपये का नुकसान उठाना पड़ता है। छत्तीसगढ़, बुंदेलखंड, बिहार, उड़ीसा के कई हिस्सों से लगातार खबरें आती हैं कि आमलोग दूषित जल के सहारे जीवन यापन करने को मजबूर हैं। जहां तक श्रीलंका की बात है तो वहां सुनामी के प्रलय से पहले तक सिर्फ 40 फीसद ग्रामीण आबादी के पीने का पानी सरकार मुहैया करा रही थी और सुनामी के बाद ऎसी स्थिति बन गई है कि ग्रामीण और शहरी दोनों तबकों को पेयजल के नाम पर खारा पानी मिल रहा है।

जल ही जीवन

जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है। सब लोग इस तथ्य को भली-भाँति जानते हैं कि जल कितना महत्त्वपूर्ण है। लेकिन यह सब बातें हम तब भूल जाते हैं, जब अपनी पानी से भरी टंकी के सामने मुँह धोते हुए पानी को बर्बाद करते रहते हैं। हम कई लीटर मूल्यवान पानी अपनी कीमती कार को नहलाने में या फिर स्वयं भी काफ़ी देर तक नहाने में बर्बाद कर देते हैं। किताबी दुनिया और किताबी ज्ञान को हममें से बहुत कम ही असल ज़िंदगी में उतार पाते हैं और इसी का नतीजा है कि आज भारत और विश्व के सामने पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। धरातल पर तीन चौथाई पानी होने के बाद भी पीने योग्य पानी एक सीमित मात्रा में ही उपलब्ध है।

बारिश के पानी का महत्त्व

विश्व की बढ़ती हुई जनसंख्या तथा औद्योगिक विकास ने भी प्रदूषण में बढ़ोतरी की है, जिससे अब स्वच्छ जल की मांग और भी बढ़ गई है। मानव तथा पर्यावरण दशा, पेय जल तथा कृषि जल की वर्तमान और भविष्य की उपलब्धता खतरे में है। इसके बावजूद जल प्रदूषण एक प्रभावशाली मुद्दा नहीं बन पा रहा है। आज का समय बहुत महत्त्वपूर्ण है, जब प्रत्येक व्यक्ति को वर्षा का पानी अधिक से अधिक बचाने की कोशिश करनी चाहिए। बारिश की एक-एक बूँद कीमती है। इन्हें सहेजना बहुत ही आवश्यक है। यदि अभी पानी नहीं सहेजा गया, तो संभव है कि पानी केवल हमारी आँखों में ही बच पाएगा। पहले कहा गया था कि हमारा देश वह देश है, जिसकी गोदी में हज़ारों नदियाँ खेलती थीं, किंतु आज वे नदियाँ हज़ारों में से केवल सैकड़ों में ही बची हैं। वे सब नदियाँ कहाँ गई, कोई नहीं बता सकता। नदियों की बात छोड़ दी जाये तो हमारे गाँव-मोहल्लों से तालाब आज गायब हो गए हैं। इनके रख-रखाव और संरक्षण के विषय में बहुत कम कार्य किया गया है।

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पानी को बचाने के लिए सुझाव

  • अपने लॉन या बगीचे में सुबह जल्दी या देर शाम को पानी डालें। 
  • सर्द, बारिश या हवा वाले दिनों में पानी न डालें। 
  • अपनी कार को धोने के लिए पाइप की जगह बाल्टी का उपयोग करें। 
  • जब आप अपने हाथ धोएं, दांत साफ़ करें या शावर का उपयोग करें, तब नल को खुला न छोड़ें। जब आप नल का उपयोग न कर रहें हों, तब नल को खुला न छोड़ें। 
  • छोटी अवधि के लिए शावर का उपयोग करें। 
  • जब आप कपड़े धोएं, तब आपको कपड़ों के अनुसार पानी का उपयोग करना चाहिए। 
  • जब आप बर्तन धोएं, तब आप पानी को व्यर्थ न बहाएं। 
  • समूह पौधों को एक सामान पानी की ज़रूरत होती है, इसलिए पौधों को पानी देते समय कुछ पौधों को अत्यधिक पानी देने से बचना चाहिए। 
  • यथासंभव आहार को कम पानी में पकाएं। यह पोषक तत्वों की अधिकता को बनाए रखने में मदद करता है।

विश्व जल दिवस का थीम

  • वर्ष 1993 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “शहर के लिये जल”।
  • वर्ष 1994 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “हमारे जल संसाधनों का ध्यान रखना हर एक का कार्य है”।
  • वर्ष 1995 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “महिला और जल”।
  • वर्ष 1996 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “प्यासे शहर के लिये पानी”।
  • वर्ष 1997 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “विश्व का जल: क्या पर्याप्त है”।
  • वर्ष 1998 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “भूमी जल- अदृश्य संसाधन”।
  • वर्ष 1999 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “हर कोई प्रवाह की ओर जी रहा है”।
  • वर्ष 2000 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “21वीं सदी के लिये पानी”।
  • वर्ष 2001 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वास्थ के लिये जल”।
  • वर्ष 2002 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “विकास के लिये जल”।
  • वर्ष 2003 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “भविष्य के लिये जल”।
  • वर्ष 2004 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और आपदा”।
  • वर्ष 2005 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “2005-2015 जीवन के लिये पानी”।
  • वर्ष 2006 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और संस्कृति”।
  • वर्ष 2007 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल दुर्लभता के साथ मुंडेर”
  • वर्ष 2008 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वच्छता”।
  • वर्ष 2009 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल के पार”।
  • वर्ष 2010 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वस्थ विश्व के लिये स्वच्छ जल”।
  • वर्ष 2011 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “शहर के लिये जल: शहरी चुनौती के लिये प्रतिक्रिया”।
  • :वर्ष 2012 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और खाद्य सुरक्षा”।
  • वर्ष 2013 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल सहयोग”।
  • वर्ष 2014 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और ऊर्जा”।
  • वर्ष 2015 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और दीर्घकालिक विकास”।
  • वर्ष 2016 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय होगा "जल और नौकरियाँ"
  • वर्ष 2017 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय "अपशिष्ट जल" होगा।
  • वर्ष 2018 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय "जल के लिए प्रकृति के आधार पर समाधान" होगा।

जागरुकता की आवश्यकता

पानी का महत्व भारत के लिए कितना है, यह हम इसी बात से जान सकते हैं कि हमारी भाषा में पानी पर आधारित कई मुहावरे और लोकोक्तियाँ हैं। विज्ञान और पर्यावरण के ज्ञान से मानव ने जो प्रगति की है, उसे प्रकृति संरक्षण में लगाना भी ज़रूरी है। पिछले सालों में तमिलनाडु ने वर्षा जल का संरक्षण करके जो मिसाल क़ायम की है, उसे सारे देश में विकसित करने की आवश्यकता है। ऐसा नहीं है कि पानी की समस्या से हम जीत नहीं सकते। अगर सही ढ़ंग से पानी का सरंक्षण किया जाए और जितना हो सके पानी को बर्बाद करने से रोका जाए तो इस समस्या का समाधान बेहद आसान हो जाएगा। लेकिन इसके लिए जरुरत है- जागरुकता की। एक ऐसी जागरुकता की, जिसमें छोटे से छोटे बच्चे से लेकर बड़े-बूढ़े भी पानी को बचाना अपना धर्म समझें।

"जल संरक्षण के लिए पानी की हर बूंद बेहद कीमती होती है।"

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